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Nov 2, 2019

उड़ते हुए पंछी-संजोग १९४३

देसी फिल्मों में चार्ली चैप्लिन जैसी मूंछें रखने वाले
काफी कलाकार हमने देखे हैं अभी तक. ३० और ४०
के दशक में एक कलाकार काफी चर्चित थे अपनी
भाव भंगिमाओं की वजह से-नूर मोहम्मद चार्ली. नाम
में आगे चार्ली लगा है इससे अनुमान लगाइए कि ये
चार्ली चैप्लिन के बड़े फैन रहे होंगे. गीत देख कर भी
आपको यकीन हो जायेगा इस बात पर.

कारदार निर्देशित इस फिल्म का संगीत नौशाद ने तैयार
किया है. प्रस्तुत गीत लिखा है दीनानाथ मधोक ने और
इसे गाया है नूर मोहम्मद चार्ली संग सुरैया ने. परदे पर
चार्ली के साथ मेहताब हैं.

सन १९३२ की एक फिल्म पाक दमन रक्कासा से शुरू
हुआ उनका कैरियर १९६३ की फिल्म अकेली मत जइयो
तक चला. बीच के समय में वे विभाजन के बाद पडोसी
देश भी रह आये. अंत समय उनका अमरीका में गुज़रा.

हिंदी सिनेमा के पहले स्टार कॉमेडियन नूर मोहम्मद की
आवाज़ भी जनता को पसंद थी और वे अपनी अदाओं और
गायकी दोनों के लिए चर्चित रहे.




गीत के बोल:

उड़ते हुए पंछी
कौन इनको बताये
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
दिल उनका हुआ जाये
उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
क्या तुझसे कहूँ हाय
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
वो हमको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी

मुंह की बातें सारी
झूठों के झूठे दिलासे
मुंह की बातें सारी
झूठों के झूठे दिलासे
कोई मर जाये उनकी बाला से
कोई मर जाये उनकी बाला से

उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
कौन इनको बताये
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
हम उनको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी

हो ओ ओ दिल है हसरतों से भरा रे
ये न लगी जाने ज़रा रे
हूँ
दिल है हसरतों से भरा
अरे अरे हाँ
ये न लगी जाने ज़रा
दिल में आ के देख मेरे
कौन खोटा कौन खरा
दिल में आ के देख मेरे
कौन खोटा कौन खरा

उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी
क्या तुझसे कहूँ हाय
जो पास में बैठे हैं
जो पास में बैठे हैं
वो हमको बड़े भाये
उड़ते हुए पंछी
उड़ते हुए पंछी.
……………………………………………
Udte hue panchhi-Sanjog 1943

Artists: Noor Mohammad Charlie, Mehtab

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Apr 28, 2010

चला है कहाँ-संजोग १९६१

कुछ गीत स्वतः दिमाग में कौंध जाते हैं। ऐसा ही एक गीत है
जो मुझे सदा से आकर्षित करता रहा। कुछ विशेष वजह होगी इसकी,
मुझे चल, चला, चला है, इत्यादि शब्द वाले गाने ज्यादा ध्यान में
आते हैं। उसके अलावा जो गीत थोड़ी ऊंची पट्टी पर गाये गए होते
हैं वो दिमाग के किसी कोने में ज़रूर अपना स्थान बना लेते हैं।

ये प्रश्नवाचक गीत है फिल्म संजोग से जिसमे अभिनेत्री अनीता गुहा
नायक प्रदीप कुमार से संगीतमय प्रश्न पूछ रही हैं । गीत राजेंद्र कृष्ण
का लिखा हुआ है और धुन है मदन मोहन की। फिल्म के ३ गीतों पर
हम पहले चर्चा कर चुके हैं। आइये इस मधुर गीत का आनंद उठायें ।



गीत के बोल:



चला है कहाँ
चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,


चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

अँखियाँ मेरी सपने तेरे, हो हो
देख ज़रा ओ साथी मेरे, हो हो
दिल दीवाना तुझे पुकारे
करे इशारे ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

आ, आ, हा हा, आ आ आ
हा हा, आ आ आ आ

सावन भी आनेवाला है, हो हो
रंग नया लानेवाला है हो ओ
रुत अलबेली मुझे अकेली
देख सहेली ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

फूल बनी है कली अभी तो हो ओ
बनायें है दिल की गली अभी तो हो ओ
अभी अभी तो पायल मेरी बाजी
छम छम ..... ना जा

चला है कहाँ
दुनिया इधर है तेरी
प्यार इधर है तेरा
आ जा हो, आ जा, हो, आ जा,

चला है कहाँ

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Jan 10, 2010

रूप ये तेरा जिसने बनाया-संजोग १९७२

अमिताभ बच्चन और माला सिन्हा की जोड़ी ! ढलती उम्र की
माला सिन्हा और चढ़ती उम्र के अमिताभ की जोड़ी थोड़ी
अजीब सी लगी इस फिल्म में। निर्माता निर्देशक एस एस बालन
ने थोड़ी सी ही फ़िल्में बनाई हिंदी में जैसे, औरत(१९६७),
लाखों में एक(१९७१), तीन बहुरानियाँ(१९६८)। इनमे से
कोई भी हिट फिल्म नहीं है। जो भी हो, ये गीत सुनने
लायक है और इसे गाया है किशोर कुमार ने। गीतकार हैं
आनंद बक्षी और संगीत है राहुल देव बर्मन का।



गीत के बोल:

रूप ये तेरा जिसने बनाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
रंग ये तेरा जिसने सजाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूम
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूम

रूप ये तेरा

कारी कारी रतियाँ से काजल चुराया
तेरी प्यारी प्यारी अखियों में लगाया
कारी कारी रतियाँ से काजल चुराया
तेरी प्यारी प्यारी अखियों में लगाया
आ हा हा हा हा, आ हा हा हा, आ हा हा
मुख पे सवेरा जिसने सजाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं

रूप ये तेरा

सुन्दर ऐसी कोई कविता नहीं है
चंचल ऐसी कोई सरिता नहीं है
सुन्दर ऐसी कोई कविता नहीं है
चंचल ऐसी कोई सरिता नहीं है
आ हा हा हा हा, आ हा हा हा, ए हे हे
अंग अंग तेरा जिसने बनाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं

रूप ये तेरा

गोरा बदन जैसे शीशे का प्याला
बन गया मैं तो बिन पिए मतवाला
गोरा बदन जैसे शीशे का प्याला
बन गया मैं तो बिन पिए मतवाला
ए हे हे हे हे, उहं हूँ हूँ हूँ, ए हे हे
हाल ये मेरा जिसने बनाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं

रूप ये तेरा जिसने बनाया वो
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं
कहीं मिल जाए तो हाथ चूम लूं

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Aug 1, 2009

वो भूली दास्तान -संजोग १९६१

आइये आज आपको संजोग फिल्म का एक गीत सुनवाया जाए.
दो गीत हम सुन चुके हैं पहले-'बदली से निकला है चाँद-लता'
और 'भूली हुई यादों-मुकेश' .

'संजोग' फ़िल्म का एक लोकप्रिय गाना जिसको कई कलेक्शन
में प्रस्तुत किया गया - वो भूली दास्तान लो फिर याद आ गई।
इस गाने के कई इंस्ट्रुमेंटल वर्ज़न भी आए बाज़ार में , बांसुरी पर,
एल्क्ट्रिक गिटार , हवायियन गिटार , वायलिन पर। इसकी धुन
आकर्षक है इसलिए ये आसानी से जुबान पर चढ़ जाता है. राजेंद्र कृष्ण
और मदन मोहन के गीतों में सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक इसको मैं
गिनता हूँ। गाना अनीता गुहा पर फिल्माया गया है।



गाने के बोल

वो भूली दास्तां, लो फिर याद आ गई

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी
नज़र के सामने घटा सी छा गयी

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

कहाँ से फिर चले आये, ये कुछ भटके हुए साये
ये कुछ भूले हुए नग़मे, जो मेरे प्यार ने गाये
ये कुछ बिछडी हुई यादें, ये कुछ टूटे हुए नग़मे
पराये हो गये तो क्या, कभी ये भी तो थे अपने
न जाने इनसे क्यों मिलकर, नज़र शर्मा गयी

वो भूली दास्तां ...

उम्मीदों के हँसी मेले, तमन्नाओं के वो रेले
निगाहों ने निगाहों से, अजब कुछ खेल से खेले
हवा में ज़ुल्फ़ लहराई, नज़र पे बेखुदी छाई
खुले थे दिल के दरवाज़े, मुहब्बत भी चली आई
तमन्नाओं की दुनिया पर, जवानी छा गयी

वो भूली दास्तां ...

बड़े रंगीन ज़माने थे, तराने ही तराने थे
मगर अब पूछता है दिल, वो दिन थे या फ़साने थे
फ़क़त इक याद है बाकी, बस इक फ़रियाद है बाकी
वो खुशियाँ लुट गयी लेकिन, दिल-ए-बरबाद है बाकी
कहाँ थी ज़िन्दगी मेरी, कहाँ पर आ गयी

वो भूली दास्तां ...

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी
नज़र के सामने घटा सी छा गयी

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

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Jun 28, 2009

भूली हुई यादों-संजोग १९६१

उन दिनों में कल्याणजी आनंदजी मुकेश के साथ कई हिट
गीत दे रहे थे। आम संगीत प्रेमी ये ही अनुमान लगाते हैं
कि ये कल्याणजी आनंदजी का संगीतबद्ध किया हुआ नगमा
है। मदन मोहन ने यदा कदा ही संगीत प्रेमियों को भ्रमित
किया होगा। ये उन वाकयों में से एक हो सकता है। सारे
क़यास, अनुमानों के बावजूद धुन बढ़िया है।

मदन मोहन ने राजा मेहँदी अली खान के साथ काम करने
के काफ़ी समय बाद अपने पुराने साथी राजेंद्र कृष्ण को याद
किया और इस फ़िल्म में सभी गीत राजेंद्र कृष्ण के लिखे
हुए है।




भूली हुई यादों मुझे इतना ना सताओ
अब चैन से रहने दो मेरे पास न आओ
भूली हुई यादों मुझे इतना ना सताओ
अब चैन से रहने दो मेरे पास न आओ
भूली हुई यादों

दामन में लिये बैठा हूँ टूटे हुए तारे
टूटे हुए तारे
कब तक मैं जियूँगा यूँ ही ख्वाबों के सहारे
ख्वाबों के सहारे
दीवाना हूँ अब और ना दीवाना बनाओ
अब चैन से रहने दो मेरे पास न आओ
भूली हुई यादों

लूटो ना मुझे इस तरह दोराहे पे ला के
दोराहे पे ला के
आवाज़ न दो एक नई राह दिखा के
नई राह दिखा के
संभला हूँ मैं गिर गिर के मुझे फिर ना गिराओ
अब चैन से रहने दो मेरे पास ना आओ

भूली हुई यादों मुझे इतना ना सताओ
अब चैन से रहने दो मेरे पास न आओ
भूली हुई यादों
……………………………………………………..
Bhooli hui yaadon-Sanjog 1961

Artist: Pradeep Kumar, Shubha Khote

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Jun 15, 2009

बदली से निकला है चाँद - संजोग १९६१

सन १९६० की फिल्म है संजोग। फिल्म का नाम शायद बहुत
कम लोगों ने सुना होगा । लेकिन, जैसे ही मुकेश के गए हुए
गाने-भूली हुई यादों का जिक्र होता है फौरन दिमाग में फिल्म
का नाम आ जाता है । वैसे मदन मोहन भक्त ये दावा करते हैं
कि इस फिल्म का सबसे प्रसिद्द गाना "वो भूली दास्तान" है।
संजोग फिल्म में कुछ कर्ण प्रिय गाने हैं. उनमे से एक है
"बदली से निकला है चाँद" । इस गाने को लोकप्रिय बनाने
का श्रेय विविध भारती को जाता है। विविध भारती पर अक्सर
इस गाने का इंस्ट्रुमेंटल बजा करता था । श्रीधर केंकरे का बांसुरी
पर बजाया हुआ । यकीन मानिये वो इंस्ट्रुमेंटल मूल गाने से भी
ज्यादा बढ़िया सुनाई पड़ता है ।

विडम्बना देखिये, अनीता गुहा जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्री को
कुछ ही कर्णप्रिय नग्मे हिंदी फिल्म्स में मिले हैं। अगर यही गाना
किसी और नामचीन अभिनेत्री पर फिल्माया गया होता तो शायद
अमर हो जाता।

गायिका : लता मंगेशकर
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
संगीतकार: मदन मोहन



गीत के बोल :

बदली से निकला है चाँद, परदेसी पिया
लौट के तू घर आ जा , घर आ जा
बदली से निकला है चाँद

पूछे पता तेरा ठंडी हवाएं
चुप मुझे देख के चुप हो जाएँ

लायें तो कैसे तुझे ढूंढ के लायें, हो
ढूंढ के लायें

बदली से निकला......

आ के गुजर गयीं कितनी बहारें
और बरस गयीं कितनी फुहारें

आजा तुझे हम कबसे पुकारें, हो
कबसे पुकारें

बदली से निकला है चाँद, परदेसी पिया
लौट के तू घर आ जा , घर आ जा
बदली से निकला है चाँद

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