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Aug 19, 2019

बहारों से पूछो-मेरा घर मेरे बच्चे १९६०

पूछो शब्द मुखड़े में आता है ऐसे दो गीत मुझे ध्यान हैं एक तो
यही जो आज आपको सुनवा रहा हूँ और दूसरा सलमान की फिल्म
कुर्बान का-दीवानों से पूछो. याद तो और भी हैं मगर सबसे ज्यादा
यही दो ध्यान आते हैं.

मेरा घर मेरे बच्चे का गीत एक भाई साहब यूँ गुनगुनाते थे-बहारों
से पूछो दे विल टेल यू. आगे की लाइनें ब्ला ब्ला ब्ला. इस वजह से
याद हो गया और फिल्म कुर्बान के गीत में हमने ही फिट कर दिया-
दे विल टेल यू उन भाई साहब के स्मरण में. ऐसे दिमागी स्फुरण
स्वतः होते हैं और संगीत प्रेमियों के दिमाग में ज़रूर होते हैं मगर ऐसे
दिमागी स्फुरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होते आपने केवल मिमिक्री
शो वगैरह में देखा होगा.

गीत की बात करें जिसे मुकेश संग सुमन कल्याणपुर ने गाया है.
गीत में आपको सुबिराज और नाज़ की जोड़ी दिखलाई देगी जो असल
जीवन में भी जोड़ी है. सुबीरज पर फिल्माया एक गीत आपको हमने
सुनवाया था कुछ दिन पहले. हसरत जैपुरी के लिखे गीत पर एक
निहायत रूमानी तर्ज़ बनाई है सरदार मलिक ने. गीत की गति कम
है मगर निरंतरता शानदार है इसकी.



गीत के बोल:

बहारों से पूछो मेरे प्यार को तुम
तुम्हारे तराने हम गा रहे हैं
नजारों से पूछो मेरे प्यार को तुम
तुम्हारे लिए हम जिए जा रहे हैं
बहारों से पूछो

कभी मैं पपीहा तुम्हारे लिए हूँ
कभी मैं चकोर तुम्हारे लिए हूँ
अजी मैं भी कोयल तुम्हारे लिए हूँ
मोहब्बत में पागल तुम्हारे लिए हूँ
मेरे प्यार ने ही दिया रूप तुमको
ये गुंचे तुम्हारे जो नज़र आ रहे हैं
नजारों से पूछो

अगर जान तुम हो तो हम भी तो दिल हैं
भरे हैं हज़ारों मोहब्बत के अरमान
अगर तुम हो सागर तो मैं भी हूँ नदिया
है दोनों दिलों में मोहब्बत के तूफ़ान
मेरे प्यार का कोई किनारा नहीं है
तेरे प्यार में हम बहे जा रहे हैं
बहारों से पूछो

ये उड़ती घटायें मस्ती लुटाएं
जैसे तुम्हारी शराबी निगाहें
ये ठंडी हवा भरती है आहें
समझो इन्हें तुम हमारी सदाएं
फिजाओं में देखो ये बादल नहीं है
ये आँचल तुम्हारा लहरा रहा है

बहारों से पूछो मेरे प्यार को तुम
तुम्हारे तराने हम गा रहे हैं
नजारों से पूछो मेरे प्यार को तुम
तुम्हारे लिए हम जिए जा रहे हैं
बहारों से पूछो
.................................................................................
Baharon se poochho-Mera ghar mere bachche 1960

Artists: Subiraj, Naaz

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Jan 27, 2018

आ जा मेरे साथी आ जा-सारंगा १९६१

सन १९६१ की फिल्म सारंगा से एक गीत सुनते हैं. इसे गाया है
आशा भोंसले और रफ़ी ने. भरत व्यास की रचना है और इसके
संगीतकार हैं सरदार मलिक.

छोटा गीत है ये और इसके दो संस्करण मौजूद हैं फिल्म में.
आज इसे सुनिए दूसरा फिर कभी सुन लेंगे. दूसरे संस्करण में
हेमंत कुमार की आवाज़ है.





गीत के बोल:

आ जा मेरे साथी आ जा
आ जा मेरे साथी आ जा
आ जा आ जा

यही यही जादू भरी मीठी मीठी तान
जिसको सुन कर डोलते मेरे तन मन प्रान
किस मुरली ने छीन ली मेरी सुबह और शाम
रातों की निंदिया गई दिन का गया आराम
..................................................................
Aa ja mere sathi aa-Saranga 1961

Artists: Sudesh Kumar, Jayshri Gadkar

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Sep 11, 2016

लागी तुमसे लगन साथी-सारंगा १९६०

फिल्म सारंगा से दो मधुर गीत सुन चुके हैं आप. आज सुनते
हैं लता और मुकेश का गाया एक युगल गीत. गीत फिल्माया
गया है सुदेश कुमार और जयश्री गडकर पर.

सुदेश कुमार उस समय हिंदी फिल्म जगत में आये जब पौराणिक
और ऐतिहासिक फिल्मों के लिए भारत भूषण और प्रदीप कुमार
जैसे कलाकार मौजूद थे. उसके अलावा समय के साथ पीरियड
फ़िल्में थोड़ी कम हो चलीं उसी वजह से उनको ज्यादा काम नहीं
मिला. उनका चेहरा ऐसी फिल्मों के लिए उपयुक्त था जिनका कि
उल्लेख हम ऊपर कर चुके हैं.

जयश्री गडकर तो ऐसी फिल्मों के फेवरेट नाम था उस समय.
उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में अभिनय किया था और अपनी अलग
पहचान बना ली.

गीत भरत व्यास का है और संगीत सरदार मलिक का. ये झूला
श्रेणी का गीत है.




गीत के बोल:

लागी तुमसे लगन साथी छूटे ना
हाय छूटे ना कभी छूटे ना
नाता जनम जनम का टूटे ना
हाय टूटे ना कभी टूटे ना
लागी तुमसे लगन साथी छूटे ना


चाहे क़िसमत हमको ठुकराये
चाहे दुनिया दुश्मन बन जाये
चाहे क़िसमत हमको ठुकराये
चाहे दुनिया दुश्मन बन जाये
चाहे सब रूठें टू रूठे ना

लागी तुमसे लगन साथी छूटे ना
हाय छूटे ना कभी छूटे ना
नाता जनम जनम का टूटे ना
हाय टूटे ना कभी टूटे ना
लागी तुमसे लगन साथी छूटे ना

ये प्रीत के हैं नाज़ुक धागे
दुनिया की नज़र कहीं ना लागे
ये प्रीत के हैं नाज़ुक धागे
दुनिया की नज़र कहीं ना लागे
कोई प्यार हमारा लूटे ना

लागी तुमसे लगन साथी छूटे ना
हाय छूटे ना कभी छूटे ना
नाता जनम जनम का टूटे ना
हाय टूटे ना कभी टूटे ना
लागी तुमसे लगन साथी छूटे ना
.................................................................
Laagi tumse lagan-Saranga 1960

Artists: Sudesh Kumar, Jayshri Gadkar

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Aug 14, 2016

वो ही उदी उदी घटाएं हैं-मेरा घर मेरे बच्चे १९६०

कम सुने गए मगर मधुर संगीत देने वाले संगीतकारों की धुनों
में से एक पेश है आज. श्वेत श्याम युग वाली फिल्म सन १९६०
की मेरा घर मेरे बच्चे में ये गीत हसरत जयपुरी के बोलों पर
मुकेश ने गाया है.

शब्द विशेष से पूरे मामले का अर्थ बदल जाता है. यहाँ एक शब्द
प्रयोग में लाया गया है वो भी मुखड़े में, जो कम चलन वाला है,
‘उदी’, इसका अर्थ ढूँढने के लिए आपको गूगल देव की मदद लेना
पड सकती है.

गायन शैली में ४० के दशक का असर है. एक लाइन को दो दो
बार रिपीट करके गाया गया है. मुखडा केवल एक बार गाया
गया है, ऐसे गीत हमें पुराने संगीतकारों ने काफी सुनाये हैं. गीत
के फॉर्मेट में थोडा बदलाव हुआ ५० के दशक में और वो काफी
हद तक आज भी कायम है. आजकल एक नया ट्रेंड बना हुआ
है-असमान पंक्तिर्यों वाले गीतों को गाने का ट्रेंड.




गीत के बोल:

वोही उदी उदी घटाएं हैं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं
वही भीगी-भीगी हवाएं हैं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं

है कली से गुल को मिले हुए,
यहाँ ज़ख़्म-ए-दिल है खिले हुए
वही कोयलों की सदाएं है
वही कोयलों की सदाएं है
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं

जो किये थे वादे निगाहों में
वही उड़ गए आए हवाओं में
वही खोई-खोई फ़िज़ाएं हैं
वही खोई-खोई फ़िज़ाएं हैं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं

यहीं कल तो तुम मेरे साथ थे
गोरे हाथों में मेरे हाथ थे
मगर आज होँठों पे आहें हैं
मगर आज होँठों पे आहें हैं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं
एक तुम नहीं हो तो कुछ नहीं
..........................................................................
Wo hi udi udi ghatayen-Mera ghar mere bachche 1960

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Jun 2, 2016

सारंगा तेरी याद में-सारंगा १९६०

हमने पोस्ट साफ़ सुथरी रखने की ठान ली है अतः
केवल बोल पढ़ें और गीत सुनें/देखें.

फ़िल्म: सारंगा
वर्ष: 1960
गायक: मुकेश
गीतकार: भरत व्यास
संगीतकार: सरदार मलिक



गीत के बोल:

सारंगा तेरी याद में नैन हुए बेचैन
मधुर तुम्हारे मिलन बिना
दिन कटते नहीं रैन, हो ओ
सारंगा तेरी याद में

वो अम्बुवा का झूलना, वो पीपल की छाँव
घूँघट में जब चाँद था, मेहंदी लगी थी पांव
आज उजड़ के रह गया, वो सपनों का गाँव
सारंगा तेरी याद में

संग तुम्हारे दो घड़ी, बीत गये जो पल
जल भर के मेरे नैन में, आज हुए ओझल
सुख ले के दुःख दे गयीं, दो अखियाँ चंचल

सारंगा तेरी याद में नैन हुए बेचैन
मधुर तुम्हारे मिलन बिना
दिन कटते नहीं रैन, हो ओ
सारंगा तेरी याद में
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Saranga teri yaad mein-Saranga 1960

Artists-Sudesh Kumar, Jayshri Gadhkar

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Jul 12, 2011

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ-आब-ए-हयात १९५५

सरदार मालिक के किसी भी गीत को सुने अरसा हो गया ।
१९५५ की फिल्म आब-ए-हयात से आज दूसरा गीत सुनवा
रहे हैं आपको। इस गीत के बोल लिखे हैं हसरत जयपुरी
ने और संगीत तैयार किया है सरदार मालिक ने। गीत को
स्मृति बिश्वास पर फिल्माया गया है। कोरस वाले गीत की
गीता दत्त प्रमुख गायिका हैं ।

स्मृति बिश्वास ने अपनी नृत्य प्रतिभा का खूब प्रदर्शन किया
है इस गीत में. एक अच्छा तेज़ गति वाला गीत है ये
मगर इसे प्रसिद्धि नहीं मिल पायी . पूरे २ घंटे की कसरत
के बाद इसके बोल लिखे जा सके हैं. उम्मीद है आपको ये ज़रूर
पसंद आएगा. अगर पसंद आये तो अपना चटका अवश्य लगायें
बजाये Ctrl+C करके अपने नोटपैड पर Ctrl+V करने के.



गीत के बोल:

मेरा दिल आ हा हा
ओ मेरी जाँ ओ हो हो
ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ इक प्यार ज़रा सा दे दे

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ दे दे दे दे दे दे दे दे दे दे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

ये पहली पहली चाहत
ये बहकी बहकी हालत
ये पहली पहली चाहत
ये बहकी बहकी हालत
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
तू फूल है मैं हूँ रंगत
तू फूल है मैं हूँ रंगत
ये झूमी झूमी जन्नत
ये झूमी झूमी जन्नत
प्यार की, ये परी तेरे दर पे खड़ी
प्यार की, ये परी तेरे दर पे खड़ी
आ इधर आ हा हा
ओ जादूगर ओ हो हो
आ इधर ओ जादूगर मतवाले
ला इश्क़ की दुनिया दे दे
ओ ला इश्क़ की दुनिया दे दे

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे, दे दे
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ दे दे दे दे दे दे दे दे दे दे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

अनमोल खुशी की लड़ियाँ
मुश्किल से मिले ये घड़ियाँ
अनमोल खुशी की लड़ियाँ
मुश्किल से मिले ये घड़ियाँ
दो रोज़ के ये अफ़साने
दो रोज़ के ये अफ़साने
कल क्या हो ख़ुदा ही जाने
कल क्या हो ख़ुदा ही जाने
महरबाँ नौजवां
महरबाँ नौजवां
ये समा फिर कहाँ
जान-ए-मन आ हा हा
मेरा बन ओ हो हो
जान-ए-मन मेरा बन अलबेले
अलबेले
तू झूम के हाँ तो कह दे
ओ तू झूम के हाँ तो कह दे

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे, दे दे
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ दे दे दे दे दे दे दे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला

ये रात का फ़ैला दामन
हर तारा दिल की धड़कन
ये रात का फ़ैला दामन
हर तारा दिल की धड़कन
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ना ताज हुकूमत मांगूं
ना ताज हुकूमत मांगूं
मैं तुझसे मोहब्बत मांगूं
मैं तुझसे मोहब्बत मांगूं
चांदनी
रात है
चांदनी रात है
तू मेरे साथ है

ये जहाँ आ हा हा
है तेरा ओ हो हो
ये जहाँ है तेरा दिलवाले
दिलवाले
क़दमों में जगह ही दे दे
ओ क़दमों में जगह ही दे दे

ओ मेरा दिल ओ मेरी जाँ चाहे ले ले
चाहे ले ले
इक प्यार ज़रा सा दे दे, दे दे
इक प्यार ज़रा सा दे दे
ओ दे दे दे दे दे दे दे
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला ला ला ला
...........................
O mera dil o meri jaan-Aab-e-Hayat 1955

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Dec 2, 2010

मैं गरीबों का दिल->आब-ए-हयात १९५५

सरदार मालिक के २-३ गीत हमने कुछ अरसे पहले सुने।
बाद में अधिकतर उनके पुत्र अन्नू मालिक के गीत सुनते
रहे।

सरदार मालिक ने अधिकतर ५० के दशक में काम किया।
१९५५ की एक फिल्म आब-ए-हयात में उनका संगीत है।
फिल्म कुछ यादगार गीतों से भरी पड़ी है। इनमे सबसे
ज्यादा बजने वाला और सुना जानेवाला गीत है हेमंत कुमार
गाया "मैं गरीबों का दिल" । गाने की विशेषता है
भारी आवाज़ वाले हेमंत कुमार के साथ फीमेल कोरस।
महिला कोरस की आवाज़ गाने की खूसूरती को और भी
निखारती है। वैसे तो हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में
ऐसे बहुत से गीत हैं जिसमे पुरुष आवाज़ के साथ
जनाना कोरस का प्रयोग किया गया हो। गीत फिल्माया
गया है प्रेमनाथ पर जो खुद भी बुलंद आवाज़ के स्वामी
थे। गीत हसरत जयपुरी का लिखा हुआ है।




गीत के बोल:

आ हा हा हा हा, हा हा हा हा
आ हा हा हा हा, हा हा हा हा

आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ

मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़बान
मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़बान

बेकसों के लिए प्यार का आसमान
बेकसों के लिए प्यार का आसमान

मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़बान
हा हा हा हा आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ

मैं जो गाता चलूँ साथ महफ़िल चले
साथ महफ़िल चले
साथ महफ़िल चले
मैं जो बढ़ता चलूँ साथ मंजिल चले
साथ मंजिल चले
साथ मंजिल चले
मुझे राहें दिखाती चले बिजलियाँ
मुझे राहें दिखाती चले बिजलियाँ

मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़बान
मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़बान

हुस्न भी देख कर मुझ को हैरान है
देखो हैरान है
देखो हैरान है
इश्क को मुझ से मिलने का अरमान है
देखो अरमान है
देखो अरमान है
अपनी दुनिया का हूँ मैं हसीं नौजवान
अपनी दुनिया का हूँ मैं हसीं नौजवान

मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़बान
मैं गरीबों का दिल हूँवतन की ज़बान

कारवां जिन्दगानी कारुकता नहीं
हाँ जी रुकता नहीं
हाँ जी रुकता नहीं
बादशाहों के आगे मैं झुकता नहीं
हाँ जी झुकता नहीं
मैं तो झुकता नहीं
चाँद तारों से आगे मेरा आशियाँ
चाँद तारों से आगे मेरा आशियाँ

मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़बान
मैं गरीबों का दिल हूँ वतन की ज़बान

तू गरीबों का दिल है वतन की ज़बान
तू गरीबों का दिल है वतन की ज़बान

बेकसों के लिए प्यार का आसमान
बेकसों के लिए प्यार का आसमान

तू गरीबों का दिल है वतन की ज़बान
तू गरीबों का दिल है वतन की ज़बान

हा हा हा हा आ आ आ आ आ
आ आ आ आ आ
..........................
Main gareebon ka dil-Aab-e-Hayat 1955

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Feb 17, 2010

पिया कैसे मिलूँ-सारंगा १९६०

पिछले गीत की पंक्तियाँ -"कागा सब तन खाइयो " सुन के
एक गीत याद आ गया। हालाँकि इस गीत का मूड पिछले गीत
से भिन्न है , मगर, ये है एक कर्णप्रिय गीत, फिल्म सारंगा से ।
इसे गाया है लता मंगेशकर और रफ़ी ने। भारत व्यास के बोलों
को सुरों में पिरोया है सरदार मलिक ने। गीत फिल्माया गया है
सुदेश कुमार और जयश्री गडकर पर। जयश्री गडकर अधिकतर
ऐतिहासिक और पौराणिक फिल्मों में ही दिखाई दीं।



गीत के बोल:

साजन ये मत जानियो
तो बिछड़े मोहे चैन
जैसे जल बिन माछली
तडपत हूँ दिन रैन

पत्ता टूटा डार से
ले गयी पवन उडाये
अब के बिछड़े कब मिलें
दूर पड़े हैं जाए
पिया कैसे मिलूँ तुझसे
मेरे पांव में पड़ी ज़ंजीर
ह्रदय में अग्नि सुलगे
नैनन से बरसे नीर
मेरे पांव पड़ी ज़ंजीर

दुनिया से है क्या शिकवा
मेरी रूठ गयी तकदीर
लाख जतन कर हार गया
सूझे ना कोई तदबीर
मेरी रूठ गयी तकदीर

पिया कैसे मिलूँ तुझसे
मेरे पांव पड़ी ज़ंजीर

दुनिया से है क्या शिकवा
मेरी रूठ गयी तकदीर

कैसे दूर करूं ये दूरी
समझ नहीं मैं पाती, जी ओ ओ ओ ओ
कैसे दूर करूं ये दूरी
समझ नहीं मैं पाती
जो मैं होती बन की चिड़िया
पंख लगा उड़ आती
उड़ने लगी थी उड़ ना सकी
किस्मत ने मारा तीर

पिया कैसे मिलूँ तुझसे
मेरे पांव पड़ी ज़ंजीर

दुनिया से है क्या शिकवा
मेरी रूठ गयी तकदीर

फूल मिले कम कांटे ज्यादा
बीज ये कैसा बोया, जी ओ ओ ओ ओ
फूल मिले कम कांटे ज्यादा
बीज ये कैसा बोया
मालिक तेरे जग में जिसने
प्यार किया वो रोया
आंसू के रंग में रंग डाली
प्यार की ये तस्वीर

पिया कैसे मिलूँ तुझसे
मेरे पांव पड़ी ज़ंजीर

दुनिया से है क्या शिकवा
मेरी रूठ गयी तकदीर

पिया कैसे मिलूँ तुझसे
मेरे पांव पड़ी ज़ंजीर

दुनिया से है क्या शिकवा
मेरी रूठ गयी तकदीर

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Dec 7, 2009

तेरे दर पे आया हूँ-चोर बाज़ार १९५४

तलत महमूद ने भी उपकृत किया गुमनाम से संगीतकारों
को इनमे से एक नाम है सरदार मालिक का । ये गीत उनकी
आवाज़ के हिसाब से ही तैयार किया गया है। पुराने संगीतकार
गायकों की रेंज का इस्तेमाल बखूबी जानते थे । आपको
मूंछों वाले शम्मी कपूर को बिना कमर हिलाए ऐसा धीमा
गीत गाते देख के आश्चर्य ज़रूर होगा। इस गीत में उनके
हाथ और हिलती गर्दन देख कर १९५४ में दर्शकों को उनके
आने वाले सुनहरे भविष्य पे ज़रा भी संदेह नहीं बचा होगा।
इस गीत में वे राज कपूर के थोड़े सकपकाने वाले खिसियानेपन
(जिससे राज कपूर स्वयं बहुत बाद में मुक्त हुए) की कॉपी करते
नज़र आ रहे हैं ।



गीत के बोल:

तेरे दर पे आया हूँ फ़रियाद ले कर
तेरे दर पे आया हूँ फ़रियाद ले कर
जुबां पर गम-ऐ-दिल की रूदाद ले कर

तेरे दर पे आया

परेशान है दिल घड़ी भर को आ जा
ज़रा मेरी सुन जा और अपनी सुना जा
कहाँ जाऊं मैं हाल-ऐ-बरबाद ले कर

तेरे दर पे आया हूँ फ़रियाद ले कर
जुबां पर गम-ऐ-दिल की रूदाद ले कर
तेरे दर पे आया

मेरे दर्द-ऐ-दिल से नहीं बेखबर तू
मेरे दर्द-ऐ-दिल से नहीं बेखबर तू
बने मेरी किस्मत जो कर दे नज़र तू
मुहब्बत की नाकामियाँ छा गयीं हैं
उम्मीदों की कलियाँ मुरझा गयीं हैं
कहीं मर न जाऊं तेरी याद ले कर

तेरे दर पे आया हूँ फ़रियाद ले कर
जुबां पर गम-ऐ-दिल की रूदाद ले कर
तेरे दर पे आया

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Nov 17, 2009

चलता रहे ये कारवां-चोर बाज़ार १९५४

सरदार मालिक एक पुराने ज़माने के संगीतकार थे।
काफ़ी सुरीली धुनों को बनने के बावजूद उनको वो प्रसिद्धि
नहीं मिल पाई जिसके वो हक़दार थे। ये उनकी धुन है फ़िल्म
चोर बाज़ार से। गायिका हैं लता मंगेशकर। इस गीत के बोल
लिखे हैं शकील बदायूनी ने। फ़िल्म देखने का सौभाग्य मुझे अभी तक
नहीं मिला है इसलिए कोई टिप्पणी करने में असमर्थ हूँ। इस गीत को
कई बार रेडियो पर सुना है और ये एक प्रेरणा देता सा प्रतीत होता है।
लोरी के रूप में इसका प्रयोग थोड़ा नयापन लिए हुए है यही इस गीत
की खूबी है।


गाने के बोल:

चलता रहे ये कारवां
उम्र-ए-रवां का कारवां
चलता रहे ये कारवां
उम्र-ए-रवां का कारवां
शाम चले, सहर चले
मंज़िल से बेखबर चले
बस यूँ ही उम्र भर चले
रुक ना सके यहाँ वहाँ

चलता रहे ये कारवां
उम्र-ए-रवां का कारवां

फूले फले मेरी कली
ग़म ना मिले तुझे कभी
गुज़रे खुशी में ज़िन्दगी
आए ना मौसम-ए-खिज़ां

चलता रहे ये कारवां
उम्र-ए-रवां का कारवां

दुनिया का तू हबीब हो
मंज़िल तेरी क़रीब हो
इन्सां तेरा नसीब हो
तुझ पे ख़ुदा की हो अमां
चलता रहे ये कारवां
उम्र-ए-रवां का कारवां

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Aug 11, 2009

हुई हमसे ये नादानी -चोर बाज़ार १९५४

जैसा कि लता-भक्त जानते हैं कि सरदार मालिक ने
भी अपनी बढ़िया धुनें लता को गाने को दीं। फ़िल्म चोर
बाज़ार में कुछ बढ़िया नगमे हैं। पी एन मालिक निर्देशित इस
फ़िल्म में शम्मी कपूर हीरो थे।

इस गीत को लिखा है शकील बदायूनी ने। छाया गीत छाप
ये गीत रात्रि में सुनने में बहुत आनंद देता है। ये फ़िल्म सन
१९५४ में आई थी । नायिका का नाम चित्रा है। ये मत पूछियेगा
कि उनकी और कौन सी हिन्दी फ़िल्में आयीं।



गीत के बोल:

हुई ये हमसे नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे
हुई ये हमसे नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे
ज़मीन की खाक़ होकर आसमान से दिल लगा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

हुआ खून-ए-तमन्ना इसका शिक़वा क्य करें तुमसे
हुआ खून-ए-तमन्ना इसका शिक़वा क्य करें तुमसे
o शिक़वा क्य करें तुमसे
न कुछ सोचा न कुछ समझा जिगर पर तीर खा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

ख़बर क्या थी गुलिस्तान-ए-मुहब्बत में भी खतरें हैं
ख़बर क्या थी गुलिस्तान-ए-मुहब्बत में भी खतरें हैं
मुहब्बत में भी खतरें हैं
जहाँ गिरती है बिजली हम उसी डाली पे जा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

न क्यों अंजाम-ए-उल्फ़त देख कर आंसू निकल आये
हाय आंसू निकल आये
जहाँ को लूटने वाले खुद अपना घर लुटा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

हुई ये हमसे नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे
ज़मीन की खाक़ होकर आसमान से दिल लगा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

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