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Jun 5, 2017

दिल ने बहुत रोका-मैं प्रेम की दीवानी हूँ २००३

कहते हैं दुनिया भर घूम के आदमी फिर आपनी जड़ों की तरफ
यानि कि बेसिक्स की तरफ लौटता है. बॉलीवुड में कुछ सालों
से अ आ इ ई ओ औ उ उ वाले गीत काफी बन रहे हैं.

सुनते हैं सन २००३ की फिल्म से एक गीत देव कोहली का लिखा
और अन्नू मलिक के संगीत निर्देशन में बना. इसे चित्रा और के के
ने गाया है.





गीत के बोल:

आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
दिल ने बहुत रोका मैने बहुत टोका
हे हे हे हे ऐ
दिल ने बहुत रोका मैने बहुत टोका
प्यार ना माना मेरा प्यार ना माना
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ
दिल को क्यों रोका ख़ुद को क्यों टोका
दिल को क्यों रोका ख़ुद को क्यों टोका
प्यार ना माना तेरा प्यार ना माना
मेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
मेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
मेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
मेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
चली आई चली आई चली आई
चली आई चली आई चली आई
आई आई आई आई चली आई चली आई

आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
ये ये ये ये ये ये ये
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ

तेरी ख़ुशी है मेरी ख़ुशी तेरी हँसी है मेरी
जो तेरी पसन्द वो मेरी पसन्द अब हो गयी हूँ मैं तेरी
तेरी ख़ुशी है मेरी ख़ुशी तेरी हँसी है मेरी
जो तेरी पसन्द वो मेरी पसन्द अब हो गयी हूँ मैं तेरी
देखूँ मैं रस्ता तेरा ही रस्ता और कोई मुझे ना जँचता आ जा ना जा
तेरी ज़िन्दगी में
मेरी-मेरी ज़िन्दगी में
तेरी-तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई

आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ

जो तू सोचे वो मैं सोचूँ और नहीं कुछ सोचा
सपना जो तेरा सपना है मेरा मैं सच करने आ पहुँचा
जो तू सोचे वो मैं सोचूँ और नहीं कुछ सोचा
सपना जो तेरा सपना है मेरा मैं सच करने आ पहुँचा
देखूँ मैं रस्ता तेरा ही रस्ता और कोई मुझे ना जँचता
आ जा ना जा
तेरी ज़िन्दगी में
मेरी-मेरी ज़िन्दगी में
दिल ने बहुत रोका मैने बहुत टोका
प्यार ना माना मेरा प्यार ना माना
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
तेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
मेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
मेरी ज़िन्दगी में चली आई चली आई
चली आई चली आई चली आई
आई आई आई आई चली आई चली आई
चली आई चली आई चली आई
आई आई आई आई चली आई चली आई

आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ ओ
आ ई ए आ आ
................................................................
Dil ne bahut roka-Main prem ki deewwni hoon 2003

Artists: Hritik Roshan, Kareena Kapoor

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Nov 7, 2016

हम तुमसे ना कुछ कह पाए-ज़िद्दी १९९७

“तब और अब” श्रृंखला के तहत गीत सुनवाए काफी अरसा हो
गया. पहले आपने सुना सन १९४८ की ज़िद्दी से एक गीत अब
सुनते हैं सन १९९७ की ज़िद्दी से एक मधुर गीत.

अपने फेवरेट चोटीवाले सिंगर का गाना हमने बहुत दिन से नहीं
सुना है. इस गीत में उनका साथ दिया है चित्रा ने. समीर के
लिखे गीत की धुन बनाई है दिलीप सेन समीर सेन की जोड़ी ने.

गीत सनी देवल और रवीना टंडन पर फिल्माया गया है. फिल्म
का निर्देशन गुड्डू धनोवा ने किया है. ऐसे सोफ्ट गीत शायद
सनी ने फिल्म सवेरे वाली गाडी में गाये थे इसके पहले.

एक बात ज़रूर है जब भी मैं “:साँसों को महकाने” वाली कुछ
चीज़ सुनता हूँ किसी गीत में, मुझे टूथपेस्ट याद आ जाता है.




गीत के बोल:

हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए
हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए
लगता है डर ये बात ये दिल की
दिल में ना रह जाए
हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए
लगता है डर ये बात ये दिल की
दिल में ना रह जाए
हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए

तुम सुनो गौर से क्या कह रहा है समां
हमनशीं छेड़ दो चाहत भरी दास्तां
कितने दिनों तक कुछ ना बताए तुम हमको तड़पाए
हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए

प्यार क्या है सनम तुम हमको समझा गए
फासले ना रहें इतने करीब आ गए
देखो हमारी खुशबू तुम्हारी साँसों को महकाए
हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए

रात भर जाग कर करवट बदलते थे हम
क्या कहें किस तरह दिलवर मचलते थे हम
कैसे बताएं तन्हा अकेले हम कितना घबराए

हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए
हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए
लगता है डर ये बात ये दिल की
दिल में ना रह जाए
हम तुमसे ना कुछ कह पाए
तुम हमसे ना कुछ कह पाए
.............................................................
Ham tumse na kuchh keh paaye-Ziddi 1997

Artists: Sunny Deol, Raveena Tandon

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Oct 26, 2016

आ ज़रा करीब आ-संतान १९९३

एक पोस्ट में हमने कल्पनाशीलता(creativity) की बात की थी
पहले. दीपक तिजोरी की छबि एक सहायक अभिनेता की बन
के रह गयी. असल में उनमें जो पोटेंशियल है उसे निर्देशक
बाहर नहीं निकल पाए. केवल  इस गीत से उनकी अभिनय
क्षमता का अगर आकलन करें तो १० में से ९ नंबर दिए जा
सकते हैं. एक मंजा हुआ निर्देशक कलाकार से बहुत कुछ
करवा सकता है. फिल्म के निर्देशक हैं दासारि नारायण राव.

आपको नायिका को पहचानने में थोड़ी देर लग सकती है. ये हैं
नीलम. गीत थोडा तेज गति वाला है और अगर आपको आपकी
शादीशुदा जिंदगी नीरस सी लगती है तो इस गीत की रिहर्सल कर
के उसे अमल में ला के उसे फिर से रोचक बना सकते हैं. नहीं
तो एक अच्छा केलोरी जलाने वाला साधन तो है ही.

एक अच्छा रोमांटिक गीत है जिसमें गायकी और वाद्य-यंत्र नियंत्रित
हैं अर्थात संयमित.

समीर के लिखे बोलों को धुन दी है आनंद मिलिंद ने. इसे गा
रहे हैं एस पी बालसुब्रमण्यम संग चित्रा.


   
   
गीत के बोल:


आ ज़रा करीब आ तुझे है मेरी कसम
आ ज़रा करीब आ तुझे है मेरी कसम
क्या हसीं है समां प्यार कर ले सनम
आ ज़रा करीब आ तुझे है मेरी कसम
क्या हसीं है समां प्यार कर ले सनम
आ ज़रा करीब आ तुझे है मेरी कसम
आ ज़रा करीब आ तुझे है मेरी कसम

ज़ुल्फ़ है खुली खुली आ संवार दूं
बाजुओं में लेट के पल गुज़ार दूं
हाँ ज़ुल्फ़ है खुली खुली आ संवार दूं
बाजुओं में लेट के पल गुज़ार दूं
चैन तो ले गयीं तेरी अंगडाईयाँ
क्या पता कब मिले ऐसी तन्हाईयाँ
ना कोई है यहाँ सिर्फ कमरे में हम
आ ज़रा करीब आ तुझे है मेरी कसम
आ ज़रा करीब आ तुझे है मेरी कसम

दो जवान बदन मिले छा गया नशा
ये मजा मिलन में है था किसे पता
हो दो जवान बदन मिले छा गया नशा
ये मजा मिलन में है था किसे पता
क्या कहें दिलरुबा साँसों की गर्मियां
चूम लूं मैं तेरे होंठों की नर्मियां
कुछ हवा सर्द है धडकनें हैं गरम
आ ज़रा करीब आ तुझे है मेरी कसम
क्या हसीं है समां प्यार कर ले सनम
आ हा उं हूँ हूँ हूँ ला ला ला ला ला

…………………………………………………….
Aa zara kareeb aa-Santaan 1993

Artists: Deepak Tijori, Neelam

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Jul 1, 2016

भटके पंछी-मैं प्रेम की दीवानी हूँ २००३

अगर आपने फिल्म के शीर्षक से ये अंदाजा लगाया कि ये
सूरज बडजात्या की फिल्म है तो आप सही हैं. फिल्म की
पटकथा और निर्देशन सूरज बडजात्या का ही है. उनका
गीत प्रेम भी बरकरार है इस फिल्म में और ११ गानों से
फिल्म भरी पड़ी है.

फिल्म से एक छोटा गीत सुनते हैं जिसे चित्रा ने गाया है.
अन्नू मलिक का संगीत है और गीत लिखा है पारंपरिक
साहब ने. पारंपरिक साहब का अंग्रेजी नाम है-Traditional

गीत मनोरंजक ढंग से प्रतुत किया गया है फिल्म में. इस
गीत में दिखाई देने वाले वाद्य यंत्र आवाज़ नहीं कर रहे हैं.





गीत के बोल:

भटके पंछी
भटके पंछी भूल ना जाना
ये जग तेरा नहीं ठिकाना
ये जग तेरा नहीं ठिकाना
ये जग तेरा नहीं ठिकाना
न न न न अ
भटके पंछी भूल ना जाना
ये जग तेरा नहीं ठिकाना

भूल से तू यहाँ पे आया
तेरे किये ये देस पराया
भूल से तू यहाँ पे आया
तेरे किये ये देस पराया
एक दिन वापस पड़ेगा जाना
जाना जाना जाना
भटके हो भटके
हो भटके पंछी
भटके पंछी भूल ना जाना
ये जग तेरा नहीं ठिकाना
......................................................
Bhatke panchhi-Main prem ki deewani hoon 2003

Artists-Kareena Kapoor, Hritik Roshan

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Feb 21, 2016

तू ही रे-बॉम्बे १९९५

एक समय एक संगीत प्रेमी मिला जो हर गीत को लगभग
‘gem’ बोला करता. उसके बार बार ये बोलने पर हमें खाने
वाला “जैम” दिखाई देने लगता. एक दिन आखिर को हमने
पूछ ही लिया. तुम्हारे स्टॉक में खाली जैम ही है, अचार,
चटनी और मुरब्बा नहीं है ?

आपको आज रीयल जैम खिलवाते .... अर रा सुनवाते हैं .
ये है फिल्म बॉम्बे का गीत. इसे फिल्माया गया है दक्षिण
के नायक अरविन्द स्वामी और उत्तर की मनीषा कोइराला
पर.  विरह के भावों से शुरू होता ये गीत मिलन पर समाप्त
होता है. महबूब कोतवाल के लिखे गीत की तर्ज़ बनाई है
रहमान ने. इसे गाया है चित्रा और हरिहरन ने.



गीत के बोल:

तू ही रे, तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जियूं
आ जा रे आ जा रे यूँ ही तड़पा न तू मुझको
जान रे जान रे इन साँसों में बस जा तू
चाँद रे चाँद रे आ जा दिल की ज़मीन पे तू
चाहत है अगर आ के मुहसे मिल जा तू
या फिर ऐसा कर धरती से मिला दे मुझको

तू ही रे, तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जियूं
आ जा रे आ जा रे यूँ ही तड़पा न तू मुझको
इन साँसों का देखो तुम पागलपन के
आये नहीं इन्हें चैन
मुझसे ये बोलती मैं राहों में तेरी
अपने बिछा दूं ये नैन
इन ऊंचे पहाड़ों से जान दे दूंगा मैं
गर तुम ना आई कहीं
तुम उधर जान उम्मीद मेरी जो तोड़ो
इधर ये जहाँ छोड़ दूं मैं
मौत और जिंदगी तेरे हाथ में दे दिया रे

आई रे आई रे ले मैं आई हूँ तेरे लिए
तोड़ा रे तोड़ा रे हर बंधन को प्यार के लिए
जान रे जान रे आ जा तुझमें समां जाऊं मैं
दिल रे दिल रे तेरी साँसों में बस जाऊं मैं
चाहत है अगर आ के मुझसे मिल जा तू
या फिर ऐसा कर धरती से मिला दे मुझको

तू ही रे, तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जियूं
आ जा रे आ जा रे यूँ ही तड़पा न तू मुझको
आ  आ
सौ बार बुलाए मैं सौ बार आऊँ
एक बार जो दिल दिया
एक आँख रोये तो दूजी बोलो
सोयेगी कैसे भला
इन प्यार की राहों में पत्थर हैं कितने
उन सब को ही पार किया
एक नदी हूँ मैं चाहत भरी
आज मिलने सागर को आई यहाँ
सजना सजना आज आंसू भी मीठे लगे

तू ही रे, तू ही रे तेरे बिना मैं कैसे जियूं
आ जा रे आ जा रे यूँही तड़पा न तू मुझको
जान रे जान रे इन साँसों में बस जा तू
चाँद रे चाँद रे आ जा दिल की ज़मीन पे तू

पल पल पल पल वक्त तो बीता जाए रे
ज़रा बोल ज़रा बोल वक्त से के वो थम जाए रे

आई रे आई रे ले मैं आई हूँ तेरे लिए
जान रे जान रे आ जा तुझमें समां जाऊं मैं
……………………………………………………
Tu hi re-Bombay 1995

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Jul 19, 2011

चुप तुम रहो चुप हम रहें-इस रात की सुबह नहीं १९९६

नए युग से एक गीत सुनवाते हैं आपको चित्रा और एम् एम् क्रीम का गाया
हुआ. एम् एम् क्रीम दक्षिण भारत के फ़िल्मी संगीतकार हैं. उन्होंने कुछ हिंदी
फिल्मों में भी संगीत दिया है, जिसमें से कुछ एक गीत प्रसिद्द हुए हैं जैसे की
फिल्म क्रिमिनल के गीत.

आज का जो गीत है वो फिल्म "चुप तुम रहो चुप हम रहें से लिया गया है.
गीत निदा फाजली ने लिखा है. फिल्म में तारा देशपांडे, निर्मल पांडे और
आशीष विद्यार्थी की प्रमुख भूमिकाएं हैं. इनमें से जो पहचान में आते हैं वो
हैं निर्मल पांडे जो शेखर कपूर निर्देशित चर्चित फिल्म बैंडिट क्वीन में काम
कर चुके हैं. कुरता पहने जो सज्जन परदे पर गा रहे हैं वो शायद माधवन हैं.




गीत के बोल:

चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
ओ ओ ओ

चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
ओ ओ ओ

चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो

आँखों में खो जाएं आँखें बोलें हाथों से हाथ
बाहों में छुपकर साँसों से जैसे डोले रात
उंगलियों को उंगलियों से
मौसमों को शोखियों से, बात करने दो

चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो

होंठों पर होंठों से लिखे बिन शब्दों के गीत
धरती से अम्बर तक गूंजे जिस्मों का संगीत
बेखुदी को बेखुदी से
आशिक़ी को आशिक़ी से, बात करने दो

चुप तुम रहो चुप हम रहें
चुप तुम रहो चुप हम रहें
खामोशी को खामोशी से
ज़िंदगी को ज़िंदगी से, बात करने दो
...................................
Chup tum raho chup hum rahen-Is raat ki subah nahin 1996

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Nov 13, 2010

पायली चुनमुन चुनमुन-विरासत १९९७

चीख-पुकार, चिल्ला-पों वाली फ़िल्में बनाने के अलावा
प्रियदर्शन की कई खूबियाँ हैं। उनका फिल्मांकन हरे
चश्मे से होता है। हरे चश्मे से मतलब उनके द्वारा दिखाए
जाने वाले दृश्य दर्शक को सुन्दर और लुभावने दिखाई देते हैं।

उदाहरण के लिए ये गीत प्रस्तुत है जिसमे भी थोडा शोरगुल
मौजूद है लेकिन नायिका को उन्होंने उसकी कल्पना से कहीं
अधिक सुन्दर बना दिया है। अधिक जानकारी के लिए पढ़ें ये
पोस्ट- तारे हैं बाराती-विरासत १९९७

आइये अब विरासत के दूसरे गीत पर बात छेड़ी जाए जिसे
थोडा अलग हट के दिखने का भरसक प्रयत्न किया गया है।
इसकी ध्वनियाँ दक्षिण भारतीय प्रतीत होती हैं मगर बोल
उत्तर भारतीय हैं। इसी को तो हम कह सकते हैं गंगा-जमुना
का संगम।

गीत में तब्बू भी मौजूद हैं जो अभिनय के मामले में इस फिल्म
के नायक , सहनायक, सहनायिकाओं पर भारी पढ़ती हैं।
उनके चेहरे के भाव ऐसे हैं जैसे नर्सरी की क्लास का कोई बच्चा
"क का कि की" बोलना सीख रहा हो। थोड़ी देर बाद वाले भाव
ऐसे हैं जैसे कोई पड़ोस के सीट पर बैठा बच्चा उनके हाथ पर
बैठ गया हो। कहते हैं चेहरे पर भाव लाने में चेहरे की बनावट
और तीखे नाक नक्श सहायक होते हैं। साधारण से चेहरे मोहरे
वाली तब्बू पर ये बात लागू नहीं होती। उनको अभिनय क्षमता
शायद विरासत में मिली हुई है । गीत लिखा है जावेद अख्तर ने
और धुन तैयार की है अन्नू मालिक ने। इसको गया है कुमार सानू
और चित्रा ने।



गीत के बोल:

पायली चुनमुन चुनमुन
झांझरी रुनझुन रुनझुन

पायलें छुनमुन छुनमुन
झाँझरें रुनझुन रुनझुन
कितना मधुर है ये मिलन

छन छनन छन चूड़ी बोले
सन सनन सन पुरवा डोले
गूंजे ये धरती और गगन

पायलें छुनमुन छुनमुन
झाँझरें रुनझुन रुनझुन
कितना मधुर है ये मिलन

कभी चलती हो छम छम
कभी चलती हो थम थम
धड़कता दिल है धम धम
जो प्यार में
आ आ
नदी बहती है झर झर
आ आ आ
हवा कहती है सर सर
आ आ आ आ
है फैली बात घर घर
आ आ
बेकार में
आ आ
गोरिया गाये गुन गुन
साजना झूमे सुन सुन
प्यार में खोये है ये मन

पायलें छुनमुन छुनमुन
झाँझरें रुनझुन रुनझुन
कितना मधुर है ये मिलन

ये बैयाँ गोरी गोरी
मैं थामू चोरी चोरी
ज़रा सुन ओ री ओ री, सुन तो ज़रा
आ आ
रहे तू मेहेकी मेहेकी
आ आ आ
चले तू बहकी बहकी
आ आ आ आ
लगे तू लहकी लहकी
आ आ आ
सुन थो सदा
आ आ
लाऊं मैं कलियाँ चुन चुन
बाजे एक तारा थुन थुन
दोनों ही सुनके हों मगन

पायलें छुनमुन छुनमुन
झाँझरें रुनझुन रुनझुन
कितना मधुर है ये मिलन
.....................................................
Payli chunmun chunmun-Virasat 1997

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Jan 18, 2010

रूप सुहाना लगता है-जेंटलमेन १९९४

कुछ गीत ऐसे होते हैं जो फिल्म के आने से पहले ही लोकप्रिय हो
जाया करते हैं। उसके अलावा ये गीत आपको फिल्म की रिलीज़
के आसपास आपको गली कूचे से लेकर ढाबे, होटल, पार्टियों में
सब जगह बजते सुनाई देते हैं। फिल्म जेंटलमेन १९९४ में भी ऐसा
ही एक गीत है जिसकी धुन अन्नू मलिक ने दक्षिण भारतीय अंदाज़
में बनाई है। नृत्य भी कुछ कुछ दक्षिण की फिल्मों से प्रेरित है। तमिल
में बनी फिल्म जेंटलमेन(1993) में ए आर रहमान का संगीत था और
ये उनकी ही मूल धुन है। अब इस सांगीतिक आदान प्रदान के ऊपर कोई
अधिकारिक प्रकाश नहीं डाला गया है। हो सकता है फिल्म के निर्माता
निर्देशक की वजह से ऐसा हुआ हो । दोनों गीत प्रस्तुत हैं आपके लिए।

कुछ भी हो, आपने पहले भी पढ़ा होगा इस ब्लॉग पर, मूल धुन अगर बढ़िया
हो तो वो बिना लोकप्रिय हुए नहीं रहती है। आप चाहे उसपर कितने ही गीत
बना लें वो अपना जादुई असर अवश्य दिखाती है।



गीत का तमिल भाई जो अर्जुन और मधु पर फिल्माया गया है, इधर है:

Ottagathai Kattiko - Gentleman


हिंदी गीत के बोल:

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

तू भी क्या चीज़ है
हर दिल अज़ीज़ है
दिल चाहे देखे तुझे हम हर दम
तू भी क्या चीज़ है
हर दिल अज़ीज़ है
दिल चाहे देखे तुझे हम हर दम

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

मैं दीवाना आवारा पागल
गलियों मैं फिरता हूँ
मैं मारा मारा

हो, मैं दीवाना आवारा पागल
गलियों मैं फिरता हूँ
मैं मारा मारा
महलों की तू रहने वाली
कैसे बनूँगा तेरा सहारा
फिर भी ना जाने
दिल क्यूँ ना माने
हर दिन हर पल तुझको पुकारे

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम
are,रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

हो, तू भी क्या चीज़ है
हर दिल अज़ीज़ है
दिल चाहे देखे तुझे हम हर दम

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम
हाय, रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम


हो ओ ओ आं आं ...........
महलों की क्या है मुझको ज़रुरत
मैं तो तेरे दिल मैं रहूंगी
फूलों पे संग संग सब चलते हैं
काँटों मैं तेरे संग चलूंगी
होने लगा तू साँसों मैं शामिल
जीना है बस मुझे तेरे सहारे

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

हो, तू भी क्या चीज़ है
हर दिल अज़ीज़ है
दिल चाहे देखे तुझे हम हर दम

तू भी क्या चीज़ है
हर दिल अज़ीज़ है
दिल चाहे देखे तुझे हम हर दम

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

रूप सुहाना लगता है
चाँद पुराना लगता है
तेरे आगे ओ जानम

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Oct 29, 2009

ओ अजनबी(धीमा) -मैं प्रेम की दीवानी हूँ २००३

कुछ संगीत प्रेमियों को अपनी कुछ गानों तक ही सीमित बांसुरी
बजाते सुना मैंने तमाम संगीत के फोरम ब्लॉग और समूहों पर.
वास्तविकता की दुनिया से दूर ये संगीत भक्त जब कुछ ऐसा
आंकडा देखते हैं तो उनको हजम नहीं होता । ऑंखें अचरज से
फटी रह जाती हैं.

2,008,059 views मतलब २० लाख से ज्यादा बार देखा गया ।

ये यू ट्यूब पे लोड एक विडियो के आंकड़े हैं। राजश्री द्वारा लोड
किया गया ये विडियो जनवरी २३, २००८ से लेकर अभी तक इतनी बार
देखा गया । इस गाने को किसी भी पुराने नामचीन गायक ने नहीं गाया
है. ये फ़िल्म राजश्री की बड़ी हिट फ़िल्म भी नहीं मानी जाती । बावजूद
इसके इसमे ऐसा क्या है जो इतने लोग इसको देख चुके हैं. कुछ तो होगा
जरूर । मेरा मानना है इसको युवाओं ने ज्यादा देखा होगा । आपकी जानकारी
के लिए बता दूँ इसको दक्षिण की प्रसिद्ध गायिका चित्रा ने गाया है । इसके
संगीतकार हैं अन्नू मलिक जो इस गाने को सुनने के बाद आपको भी
२००९ में उपलब्ध संगीतकारों से ज्यादा प्रतिभावान लगने लगेंगे।



गाने के बोल:

ओ अजनबी मेरे अजनबी
ना जाने तुम कहाँ चले गए हो
याद मुझे तुम कितना आ रहे हो
सूनी सी है दिल की गली
ओ अजनबी मेरे अजनबी

तेरे प्यार की निशानिया
बन गई कहानियाँ
फिर से मोहब्बत फिर कैसे मैं प्यार करुँ
फिर से वफ़ा का कैसे में इकरार करुँ
तेरे प्यार में मैं तो ढली
ओ अजनबी मेरे अजनबी

किस से कहूं परेशानियाँ
दिल पे कर जा मेहरबानियाँ
पल जो बीते तो लम्बी जुदाई हुयी
एक एक पल मैं तो पराई हुई
आकर मुझे ले जा अभी
ओ अजनबी मेरे अजनबी
ओ अजनबी मेरे अजनबी
.....................................................................
O ajnabi(slow)-Main prem ki deewani hoon 2003

Artists: Hritik Roshan, Kareena Kapoor, 

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Aug 11, 2009

हुई हमसे ये नादानी -चोर बाज़ार १९५४

जैसा कि लता-भक्त जानते हैं कि सरदार मालिक ने
भी अपनी बढ़िया धुनें लता को गाने को दीं। फ़िल्म चोर
बाज़ार में कुछ बढ़िया नगमे हैं। पी एन मालिक निर्देशित इस
फ़िल्म में शम्मी कपूर हीरो थे।

इस गीत को लिखा है शकील बदायूनी ने। छाया गीत छाप
ये गीत रात्रि में सुनने में बहुत आनंद देता है। ये फ़िल्म सन
१९५४ में आई थी । नायिका का नाम चित्रा है। ये मत पूछियेगा
कि उनकी और कौन सी हिन्दी फ़िल्में आयीं।



गीत के बोल:

हुई ये हमसे नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे
हुई ये हमसे नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे
ज़मीन की खाक़ होकर आसमान से दिल लगा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

हुआ खून-ए-तमन्ना इसका शिक़वा क्य करें तुमसे
हुआ खून-ए-तमन्ना इसका शिक़वा क्य करें तुमसे
o शिक़वा क्य करें तुमसे
न कुछ सोचा न कुछ समझा जिगर पर तीर खा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

ख़बर क्या थी गुलिस्तान-ए-मुहब्बत में भी खतरें हैं
ख़बर क्या थी गुलिस्तान-ए-मुहब्बत में भी खतरें हैं
मुहब्बत में भी खतरें हैं
जहाँ गिरती है बिजली हम उसी डाली पे जा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

न क्यों अंजाम-ए-उल्फ़त देख कर आंसू निकल आये
हाय आंसू निकल आये
जहाँ को लूटने वाले खुद अपना घर लुटा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

हुई ये हमसे नादानी तेरी महफ़िल में आ बैठे
ज़मीन की खाक़ होकर आसमान से दिल लगा बैठे
तेरी महफ़िल में आ बैठे

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Jul 8, 2009

कहना ही क्या-बॉम्बे १९९५

इस गाने के बोल सुनकर लिखना टेडी खीर है, तब भी
मैं कोशिश करूंगा एक बार जरूर। हम लोगों ने हारमोनियम
की बात की थी. इस गाने में भी सुंदर प्रयोग हुआ है इस
वाद्य यन्त्र का। १९९५ में आई इस लीक से हट कर बनी
फ़िल्म में संगीत है ऐ. आर. रहमान का । इस गाने को
गाया है चित्रा ने जो दक्षिण भारत की प्रसिद्ध गायिका हैं ।
चित्रा ने बॉम्बे फ़िल्म के पहले भी कई हिन्दी गीत गाये हैं
लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रियता उनके इस गाने को ही
प्राप्त हुई है। फ़िल्म में मुख्य भूमिका में अरविन्द स्वामी
और मनीषा कोइराला हैं। ऐ. आर. रहमान इस फ़िल्म तक
दक्षिण भारतीय प्रभाव से मुक्त नहीं हुए हैं। आगे जब हम
ताल फ़िल्म के गाने पर चर्चा करेंगे तब इस पहलू पर गौर
करेंगे। फिलहाल इस गाने का आनंद उठायें।






गीत के बोल:



गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप

गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप

गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप
हलचल हलचल हो गयी तेरी होंठ हैं क्यूँ चुप
हलचल हलचल हो गयी तेरी बैठे हैं गुप चुप
प्यारे प्यारे चेहरे ने करते हैं इशारा
देखा तेरी आँखों ने है सपना कोई प्यारा
हमसे गोरी न तू शर्मा कह दे हमसे ज़रा
हमसे गोरी न तू शर्मा कह दे हमसे ज़रा
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
अरमान नए ऐसे दिल में खिले
जिनको कभी मैं न जानूं
वो हमसे हम उनसे कभी न मिले
कैसे मिले दिल न जानूं
अब क्या करें क्या नाम लें
कैसे उन्हें मैं पुकारूँ
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
अरमान नए ऐसे दिल में खिले
जिनको कभी मैं न जानूं
वो हमसे हम उनसे कभी न मिले
कैसे मिले दिल न जानूं
अब क्या करें क्या नाम लें
कैसे उन्हें मैं पुकारूँ
पहली ही नज़र में कुछ हम कुछ हम
हो जाते हैं यूँ गुम
नैनों से बरसे रिमझिम रिमझिम
हमपे प्यार का सावन
शर्म थोड़ी थोड़ी हमको आये तो नज़रें झुक जाएँ
सितम थोडा थोडा हमपे शोख हवा भी कर जाएँ
ऐसी चले आँचल उठे दिल में एक तूफ़ान उठे.
हम तो लुट गए खड़े ही खड़े
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
अरमान नए ऐसे दिल में खिले
जिनको कभी मैं न जानूं
वो हमसे हम उनसे कभी न मिले
कैसे मिले दिल न जानूं
अब क्या करें क्या नाम लें
कैसे उन्हें मैं पुकारूँ
गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप
गुमसुम गुमसुम गुप चुप गुमसुम गुप चुप
हलचल हलचल हो गयी, तेरी होंठ हैं क्यूँ चुप
हलचल हलचल हो गयी, तेरी बैठे हैं गुप चुप
प्यारे प्यारे चेहरे ने करते हैं इशारा
देखा तेरी आँखों ने है सपना कोई प्यारा
हमसे गोरी न तू शर्मा कह दे हमसे ज़रा
हमसे गोरी न तू शर्मा कह दे हमसे ज़रा
इन होंठों ने माँगा सरगम सरगम
तू और तेरा ही प्यार है
आज ढूंढें है जिसको हरदम हरदम
तू और तेरा ही प्यार है
महफ़िल में भी तनहा है दिल ऐसे दिल ऐसे
तुझको खो न दे डरता है ये ऐसे ये ऐसे
आज मिली ऐसी खुशी झूम उठी दुनिया ये मेरी
तुमको पाया तो पायी जिंदगी
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
अरमान नए ऐसे दिल में खिले
जिनको कभी मैं न जानूं
वो हमसे हम उनसे कभी न मिले
कैसे मिले दिल न जानूं
अब क्या करें क्या नाम लें
कैसे उन्हें मैं पुकारूँ
कहना ही क्या ये नैन एक अनजान से जो मिले
चलने लगे मोहब्बत के जैसे ये सिलसिले
कहना ही क्या
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Kehna hi kya-Bombay 1995

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