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Oct 5, 2015

मुझे इश्क है तुझी से-उम्मीद १९७१

अगर रफ़ी ने एक से एक बढ़ कर रोमांटिक गीत गाये तो
संगीतकारों ने भी उनसे एक से एक गीत गवाए. लगभग
सभी संगीतकारों ने जिनके साथ रफ़ी ने काम किया, उन्हें
रोमांटिक धुनें अवश्य दीं. संगीतकार रवि ने भी उनसे कई
रंगों वाले गीत गवाए हैं जिनमें से कई सुपर हिट हैं और
आज भी सुने जाते हैं.

फिल्म उम्मीद से सुनते हैं आज एक रोमांटिक गीत जिसे
लिखा है शकील बदायूंनी ने. यह गीत भी ख़ासा लोकप्रिय
है और इसे आपने एक से ज्यादा बार सुन लिया होगा. इसे
फिल्माया गया है जॉय मुखर्जी और नंदा पर. फिल्म का
निर्देशन नितिन बोस ने किया था.

`

गीत के बोल:

मुझे इश्क है तुझी से
मेरी जान-ए-जिंदगानी
तेरे पास मेरा दिल है
मेरे प्यार की निशानी

मेरी ज़िन्दगी में तू है
मेरे पास क्या कमी है
जिसे ग़म नहीं खिज़ा का
वो बहार तूने दी है
मेरे हाल पर हुई है
तेरी ख़ास महरबानी
तेरे पास मेरा दिल है
मेरे प्यार की निशानी

तेरे हुस्न ने दिखाई
मुझे बेखुदी की राहें
ये हसीन लब नशीले
ये झुकी झुकी निगाहें
तेरी ज़ुल्फ़ से उठी है
ये घटाओं की जवानी
तेरे पास मेरा दिल है
मेरे प्यार की निशानी

मुझे इश्क है तुझी से
मेरी जान-ए-जिंदगानी
तेरे पास मेरा दिल है
मेरे प्यार की निशानी
..................................................................
Mujhe ishq hai tujhi se-Ummeed 1971

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Jun 14, 2012

वो हसीं दर्द दे दो-हमसाया १९६८

आज एक मकान में सूखते कपड़ों के बीच एक साये(petticoat) को सूखते  
देख एक कहावत याद आई-गर्दिश में साया भी साथ छोड़ देता है। उस
कहावत के याद आते आते एक हमसाये की याद भी आई जो अचानक
से गायब हो गया था समय के थपेड़ों में। लोग क्यूँ गायब हो जाते हैं
इसका पुख्ता जवाब मिलना असंभव सा है।

खैर फिल्म हमसाया से एक बेहद लोकप्रिय गीत सुनते हैं आज जिसे
गाया है आशा भोंसले ने। इसे फिल्माया गया है माला सिन्हा और जॉय
मुखर्जी पर। माला सिन्हा पर फिल्माए लता के गाये हिट गीत आपने
बहुतेरे सुने होंगे, ये दुर्लभ सा है। क्यूँ ना हो, फिल्म में संगीत नैयर का
जो है। अब नैयर हैं तो लता के गीत आपको फिल्म में कैसे मिल सकते
हैं भाई ? गीत शेवान रिज़वी साहब ने लिखा है

गीत क्या है जनाब   आवाज़ और वाद्य यंत्रों की आवाजों का अद्भुत मिश्रण
है और किसी भी आवाज़ की अनुपस्थिति की कल्पना करना असंभव सा
है। गीत की ताल मनमोहक किस्म की है जो दिमाग की सीढियां तुरंत ही
चढ़ जाती है।




गीत के बोल:

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैं तुमसे मांगती हूँ, ज़रा अपना हाथ दे दो
मुझे आज ज़िंदगी की, वो सुहागरात दे दो
जिसे ले के कुछ मांगूं, और मांग में सजा लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मेरी आरज़ू तो देखो, तुम्हें सामने बिठा कर
कभी दिल के पास लाकर, कभी दिलरुबा बना कर
कोई दास्तान सुन लूँ, कोई दास्तां सुना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ

मैंने प्यार के अलावा कभी तुमसे कुछ ना माँगा
तुम्हें जाने क्या समझ कर मैंने हर कदम पे चाहा
मेरा आज फैसला है तुम्हें हमसफ़र बना लूं

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
वो निगाह मुझ पे डालो, कि मैं ज़िंदगी बना लूँ

वो हसीन दर्द दे दो, जिसे मैं गले लगा लूँ
..........................................
Wo haseen dard de do-Humsaya 1968

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Aug 11, 2011

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी-एक मुसाफिर एक हसीना १९६२

दिल की धडकनें बढ़ा दिया करता था ये गीत एक ज़माने में प्रेमियों का.
यह काफी लोकप्रिय और चर्चित गीत है फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना
से.जॉय मुखर्जी के साथ विडम्बना ये है कि वाचाल फिल्म प्रेमी उन्हें गरीबों
का शम्मी कपूर कहते हैं. शम्मी कपूर के दौर में उनका फिल्मों में पदार्पण
हुआ अतः शम्मी के हाव भाव और अभिनय का थोडा बहुत असर तो मिलेगा
ही आपको. किस्मत से फ़िल्में भी उन्हें जो मिलीं, वे सब लगभग, मधुर
संगीत वाली थीं. प्रस्तुत गीत में वे दिल के बीमार के बजाये अस्पताल से
अभी अभी ठीक हो के उठे बीमार जैसे ज्यादा दिखाई देते हैं. उनकी तुलना
में नायिका के चहरे पर चमक अधिक है. मगर बीच बीच में दिखाई देने
वाली उनकी आँखों की चमक कुछ और ही अफसाना बयां करती हैं. गीत
में नायिका साधना के चेहरे के भाव गीत की हर पंक्ति के साथ बदलते हैं
जो इसगीत का सबसे मजबूत पक्ष है.

फिल्म एक मुसाफिर एक हसीना ने तो सफलता के कीर्तिमान रच दिए
थे.फिल्म से ज्यादा मगर, इसका संगीत लोकप्रिय रहा और आज भी
इसके गीत आपको सुनाई देते होंगे. प्रस्तुत गीत का तो फिल्मांकन भी
बहुत उम्दा दर्जे का है. फिल्म निर्देशक राज खोसला की ऑंखें कुछ अलग
कोण से कैमरे को घुमायाकरती थीं. ट्रोली शाट उन्हें बेहद पसंद थे जो कि
आप उनकी फिल्मों के गीत देखते वक्त अवश्य महसूस करेंगे. उनके शाट
में नायक नायिका के बजाये कैमरा ज्यादा घूमा करता था.

चम्मच वाली ढोलक बजायी जा रही है गीत में, ढोलक लटकते ही आवाज़
आनीशुरू हो जाती है. चम्मच को ढूँढने कि कोशिश न करें, फ़िल्मी ढोलक
में से कुछ भी आवाज़ निकल सकती है. वैसे हारमोनियम भी लटकते ही
बजना शुरू हो जाता है गीत में. इसको ज्यादा ज्ञानियों के एंगल से देखें तो-
प्रतीकात्मक स्वरुप ढोलक और हारमोनियम का प्रयोग हुआ है शुरू में.

यकीनन ये गीत हिंदी फिल्म संगीत के सबसे लोकप्रिय ढोलक-हारमोनियम
गीतोंमें यूँ ही नहीं गिना जाता है. नैयर की इस धुन में बहुत कसावट है और
गायकीभी अपने पूरे शबाब पर है. नैयर और एस एच बिहारी को सलाम इतने
रोमांटिक गीत के निर्माण के लिए.





गीत के बोल:

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी
मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए
कदम चूम लूँ या के आँखें बिछा दूँ
करूँ क्या ये मेरी समझ में न आए

बहुत शुक्रिया

करूँ पेश तुमको नज़राना दिल का
नज़राना दिल का
के बन जाए कोई अफ़साना दिल का
खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर
खुदा जाने ऐसी सुहानी घड़ी फिर
मेरी ज़िन्दगी में पलट के न आए

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी
मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए
बहुत शुक्रिया

खुशी तो बहुत है मगर ये भी ग़म है
मगर ये भी ग़म है
के ये साथ अपना कदम दो कदम है
मगर ये मुसाफ़िर दुआ माँगता है
मगर ये मुसाफ़िर दुआ माँगता है
खुदा आपसे किसी दिन मिलाए

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी
मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए
बहुत शुक्रिया

आ आ आ आ आ आ आ आ
मुझे डर है मुझमें ग़ुरूर आ न जाए
लगूँ झूमने मैं सुरूर आ न जाए
सुरूर आ न जाए
कहीं दिल ये मेरा ये तारीफ़ सुन कर
कहीं दिल ये मेरा ये तारीफ़ सुन कर
तुम्हारा बने और मुझे भूल जाए

बहुत शुक्रिया बड़ी मेहरबानी
मेरी ज़िन्दगी में हुज़ूर आप आए
बहुत शुक्रिया
.........................................
Bahut shukriya badi meharbani-Ek musafir ek haseena 1962

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Jul 22, 2011

आप यूँ ही अगर-एक मुसाफिर एक हसीना १९६२

फिल्म के मुसाफिर एक हसीना एक musical extravaganza है
बहुत हसीन किस्म का . सारे गीत लाजवाब हैं. जॉय मुखर्जी और
साधना की जोड़ी वाली फिल्म से एक रोमांटिक गीत पेश है जो
बेहद लोकप्रिय है और एक समय में प्रेमी प्रेमिकाओं के बीच बहुत
लोकप्रिय था क्यूंकि ये एक टूल का काम करता था . टूल किस चीज़
का आप खुद समझ जाएँ. अगर आपने लड़की/लड़का पटाया है तो
आप आसानी से समझेंगे .

गीत राजा मेहँदी अली खान का है और धुन ओ पी नय्यर की. इसके
गायक कलाकारों की आवाजें आप खुद पहचानें.




गीत के बोल:


आप यूँ ही अगर हमसे मिलते रहे
देखिए एक दिन प्यार हो जाएगा
ऐसी बातें न कर ऐ हसीं जादूगर
मेरा दिल तेरी नज़रों में खो जाएगा

पीछे-पीछे मेरे आप आतीं हैं क्यों
पीछे-पीछे मेरे आप आतीं हैं क्यों
मेरी राहों में आँखें बिछाती हैं क्यों
आप आती हैं क्यों

क्या कहूँ आपसे ये भी एक राज़ है
एक दिन इसका इज़हार हो जाएगा

कैसी जादूगरी की अरे जादूगर
कैसी जादूगरी की अरे जादूगर
तेरे चहरे से हटती नहीं ये नज़र
नहीं ये नज़र

ऐसी नज़रों से देखा अगर आपने
शर्म से रँग गुलनार हो जाएगा

मैं मोहब्बत की राहों से अंजान हूँ
मैं मोहब्बत की राहों से अंजान हूँ
क्या करूँ क्या क्या करूँ परेशान हूँ
मैं परेशान हूँ

आपकी ये परेशानियाँ देखकर
मेरा दिल भी परेशान हो जाएगा
.............................
Aap yun hi agar hamse-Ek musafir ek haseena 1962

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Jun 15, 2011

उड़ के पवन के...रुक जा ऐ हवा-शागिर्द १९६७

एक मधुर गीत सुनवाते हैं आपको लता मंगेशकर
की आवाज़ में। मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत की
तर्ज़ बनाई है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने।

सायरा बानो और जॉय मुखर्जी पर फिल्माया गया ये गीत
आपको फिल्म शागिर्द में देखने को मिलेगा। कर्णप्रिय होने के
साथ साथ दर्शनीय गीत है और इसका आकर्षण पक्षियों की
आवाजें प्रचुर मात्र में सुनाई देती हैं जो इसे खूबसूरत बनाती हैं।

अल्हड, मस्त बोल और अदाओं वाला ये गीत रात्रि के वक़्त सुनने
में सबसे ज्यादा आनंद देता है।



गीत के बोल:


हो ओ ओ ओ
रुक जा, रुक जा, रुक जा

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार


उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार


परबत परबत तेरी महक है
लट मेरी भी दूर तलक है
देखो रे डाली डाली
देखो रे डाली डाली
खिली मेरे तन की लाली
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
जो तू है वोही मैं हूँ

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

झरना दर्पण ले के निहारे
बूंदों का गहना तन पे संवारे
लहरें झूला झुलायें
लहरें झूला झुलायें
मेरे लिए गीत गएँ
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
पनघट की, मैं हूँ गोरी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा, जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

हो ओ ओ, हो ओ ओ

देख ज़रा सा तू मुझे छू के
पग बजते हैं बिन घुँघरू के
जो तेरी ताल में है
जो तेरी ताल में है
वही मेरी चाल में है
हो ओ ओ ओ ओ ओ रुक जा
मैं हिरनिया, मैं चकोरी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार

उड़ के पवन के रंग चलूंगी
मैं भी तिहारे संग चलूंगी

रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
रुक जा ऐ हवा, थम जा ऐ बहार
...........................
Ud ke pawan ke...ruk ja ae hawa-Shagird 1967

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Dec 31, 2009

तेरी सूरत से नहीं मिलती-जिद्दी १९६४

हीरो को एक तस्वीर मिल जाती है और वो उस तस्वीर वाली
लड़की को ढूंढता हुआ कहाँ पहुँचता है जानिये इस गीत में।
गौर कीजिये तस्वीर जिस कागज़ पे छपी है वो उम्दा क्वालिटी का
है जो मीलों चलने और धूप, हवा, पानी में भी ख़राब नहीं होने वाला
है। चक चक जैसी आवाजों वाले संगीत के साथ रफ़ी की आवाज़
वाला ये गीत रोचक है। उम्मीद है इस फिल्म में आर डी बर्मन ने,
जो अपने पिता के सहायक थे इस फिल्म के संगीत विभाग में,
शायद इस 'चक चक' की आवाज़ पर प्रयोग किये हों। हीरो जोय
मुखर्जी जिस सहजता और बीना किसी उत्पन्न या आसन्न संकट
के से ये गीत गा रहे हैं परदे पर इतनी महिलाओं और बालाओं के बीच
वो असल ज़िन्दगी में किसी व्यक्ति के लिए कल्पना करना भी संभव नहीं।
सूरत जो ढूंढी जा रही है उसको देख कर काश्मीर भी शर्मा जाये। ऐसा लिहा
है हसरत जयपुरी ने और इसको गा रहे हैं रफ़ी।


गीत के बोल:

तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत
तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत
हम जहाँ में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं

तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत

खूब चेहरा है तेरा दोनों जहाँ हैं पागल
सामने तेरे है फीका वो हसीं ताज महल
तेरी जुल्फों ने सनम दिल मेरा बाँध लिया
तूने ए जान-ए-सितम प्यार का जाम दिया
ज़ुल्फ़ की हम जवां ज़ंजीर लिए फिरते हैं
तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत
हम जहाँ में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं
तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत

ये तो दुनिया है यहाँ एक नहीं लाख हसीं
जो अदा देखी है तुझमें वो किसी में भी नहीं
सामना तेरा जब होगा तो क़यामत भी होगी
आँख जब तुझसे मिलेगी तो मोहब्बत भी होगी
प्यार की हम अजब तासीर लिए फिरते हैं
तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत
हम जहाँ में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं
तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत

चांदनी रात भी ज़ालिम तेरी परछाई है
और सूरज ने तेरे गालों से चमक पायी है
गर तुझे देख ले कश्मीर तो शर्मा जाए
और फ़रिश्ता जो अगर देख ले ललचा जाए
हम नए रंग की इक हीर लिए फिरते हैं

तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत
हम जहाँ में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं
तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत

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Nov 17, 2009

ज़ुल्फ़ बिखराती चली आई हो -एक कली मुस्काई १९६८

कुछ कुछ ऑटो रिक्क्षा के होर्न जैसे संगीत से शुरू होता
ये गीत मुझे बहुत पसंद है। ऐसा लगता है जैसे हिरोइन
पहाड़ से कूदने जा रही हो। लेकिन ऐसा नहीं है। सस्पेंस ख़त्म
होता है और मालूम पड़ता है कि वो हमारे हीरो से मिलने जा रही
है। बहुत ही रोमांटिक सा गीत है ये। जॉय मुखर्जी के आखिरी दौर
का एक चर्चित गाना। इसमे उनके साथ मीरा नाम की अभिनेत्री है।
कली शायद एक ही फ़िल्म में मुस्काई । दर्शक नहीं मुस्कुराये इसलिए
शायद बाद में उनको और फ़िल्में नहीं मिली। गीत लिखा है राजेंद्र कृष्ण
ने और संगीत है मदन मोहन का। जुल्फें उतनी भी बिखरी नहीं है जितना
गाने में जिक्र किया गया है। आँखों में गुलाबी डोरे तो कम दिखाई देते हैं
उसकी जगह आधा किलो काजल लगाया हुआ जरूर दिखाई दे रहा है।
दूसरा अंतरा शुरू होने पर आप महसूस करंगे की जॉय मुखर्जी की जुल्फें
ज्यादा बिखरती नज़र आ रही हैं।


गाने के बोल:

ज़ुल्फ़ बिखराती चली आई हो
ऐ जी सोचो तो ज़रा
बदली का क्या होगा
हाँ, हाँ
बदली का क्या होगा

हाय, ज़ुल्फ़ बिखराती चली आई हो
ऐ जी सोचो तो ज़रा
बदली का क्या होगा
हाँ, हाँ
बदली का क्या होगा

आंख शराबी तेरी
हाय, उसमे गुलाबी डोरे
डोरे डोरे
आंख शराबी तेरी
उसमे गुलाबी डोरे

शर्म के मारे दहकें
गाल ये गोरे गोरे
गोरे गोरे
शर्म के मारे दहकें
गाल ये गोरे गोरे

आग भड़कती चली आई ही
आग भड़कती चली आई ही

ऐ जी सोचो तो ज़रा
शोलों का क्या होगा

ज़ुल्फ़ बिखराती चली आई हो

ले बैठी हैं हमको
ये अनजान अदाएं
हाँ, ले बैठी हैं हमको
ये अनजान अदाएं

छोडके डर को तेरे
बोल कहाँ हम जाएँ
हाँ, हाँ
छोडके डर को तेरे
बोल कहाँ हम जाएँ

जाल फैलाती चली आई हो
जाल फैलाती चली आई हो
ऐ जी सोचो तो ज़रा
पंछी का क्या होगा

ज़ुल्फ़ बिखराती चली आई हो
ऐ जी सोचो तो ज़रा
बदली का क्या होगा
हाय, हाँ
बदली का क्या होगा

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Oct 26, 2009

दिल की आवाज़ भी सुन-हमसाया १९६८

"इश्क़ मासूम है इल्जाम लगाने पे ना जा" । ये पंक्तियाँ
बारंबार याद आती हैं। इनसे एक वाकया जुडा है । हुआ यूँ
एक लड़का अपने पड़ोस की एक लड़की को लेके भाग गया।
ये शायद १९७५ की बात है। बहुत दिन बीतने के बाद दोनों
लौट आए, कैसे लौटे , या लौटाए गए याद नहीं , मगर इस घटना के
बाद उस लड़की की ज़िन्दगी नर्क बन गई। करमजली, जनमजली
की उपाधियाँ उसको दिन में सैंकडों बार दी जाती । लड़की मासूम सी
थी और उसका दोष उतना नहीं था जितना उस मक्कार से दिखने वाले
युवक का। एक दिन इस विषय पर मित्रों के बीच चर्चा हो रही थी और
दूर किसीके ट्रांजिस्टर सेट पर ये गाना बजना शुरू हुआ। गाना चलता रहा
लेकिन जैसे ही ये पंक्तियाँ आई, हमारे दिमाग की सुई अटक गई। तभी से
इस गाने के शुरू होते ही वो लाइन दिमाग में घूमती है -इश्क़ मासूम है....
शेवान रिज़वी के लिखे गाने को धुन में बांधा है ओ पी नय्यर ने और गायक
.....आपको पता है, कौन है....... ;)



गाने के बोल:

दिल की आवाज़ भी सुन
दिल की आवाज़ भी सुन मेरे फ़साने पे न जा
मेरी नज़रों की तरफ़ देख ज़माने पे न जा
दिल की आवाज़ भी सुन मेरे फ़साने पे न जा
मेरी नज़रों की तरफ़ देख ज़माने पे न जा

इक नज़र देख ले
इक नज़र देख ले जीने की इजाज़त दे दे
रूठने वाले वो पहली सी मुहब्बत दे दे
इक नज़र देख ले जीने की इजाज़त दे दे
रूठने वाले वो पहली सी मुहब्बत दे दे

इश्क़ मासूम है
इश्क़ मासूम है, इलज़ाम लगाने पे न जा

वक़्त इनसान पे
वक़्त इनसान पे ऐसा भी कभी आता है
राह में छोड़के साया भी चला जाता है
वक़्त इनसान पे ऐसा भी कभी आता है
राह में छोड़के साया भी चला जाता है

दिन भी निकलेगा कभी
दिन भी निकलेगा कभी, रात के आने पे न जा
मेरी नज़रों की तरफ़ देख ज़माने पे न जा

दिल की आवाज़ भी सुन

मैं हक़ीक़त हूँ
मैं हक़ीक़त हूँ ये इक रोज़ दिखाऊँगा तुझे
बेगुनाही पे मुहब्बत की रुलाऊँगा तुझे
मैं हक़ीक़त हूँ ये इक रोज़ दिखाऊँगा तुझे
बेगुनाही पे मुहब्बत की रुलाऊँगा तुझे

दाग दिल के नहीं
दाग दिल के नहीं मिटते हैं मिटाने पे न जा
मेरी नज़रों की तरफ़ देख ज़माने पे न जा

दिल की आवाज़ भी सुन मेरे .....

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Jul 15, 2009

मुझे देख कर आपका मुस्कुराना -एक मुसाफिर एक हसीना १९६२

ये एक सुपरहिट म्यूजिकल फ़िल्म थी। निर्देशक राज खोसला की
तकरीबन सभी फिल्मों के गीत लाजवाब हैं। शम्सुल हुदा बिहारी
के बोलों को सुरों में ढाला है ओ पी नय्यर ने। इस गीत के दीवाने
बहुत से हैं । जॉय मुखर्जी साधना को कुछ समझा रहे हैं इस गीत
के माध्यम से।



गीत के बोल:

हम्म हम्म हम्म हम्म , आप का मुस्कुराना
मुझे देख कर आप का मुस्कुराना
मोहब्बत नही है तो फिर और क्या है
हो, मुझे देख कर आप का मुस्कुराना

मुझे तुम बेगाना कह लो या के दीवाना
मगर यह दीवाना जाने दिल का फ़साना
बनावट में दिल की हकीकत छुपाना
मोहब्बत नही है तो फिर और क्या है

ओ हो हो हो हो हा हा हा हा

ख्यालों में खोयी खोयी रहती हो ऐसे
मुसव्विर की चलती फिरती तस्वीर जैसे
अदा आशिकी की नजर शायराना
मोहब्बत नही है तो फिर और क्या है

ओ ओ ओ मुझे देख कर आप का मुस्कुराना
मोहब्बत नही है तो फिर और क्या है
..................................
Mujhe dekh kar aapka muskurana-Ek musafir ek haseena 1962

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