Showing posts with label Sanjay Khan. Show all posts
Showing posts with label Sanjay Khan. Show all posts

Nov 25, 2015

रूत है मिलन की-मेला १९७२

हिंदी फिल्मों के कई गीत ऐसे हैं जिन्हें एक्स्ट्रा पैशनेट कहा जा
सकता है. धुन, बोल, दृश्यावली सब कुछ वैसा ही लगने लगता
है ऐसे गीतों का. एक तबियत से बनाया गया युगल गीत जिसे
गुनगुनाने में खासी कसरत हो जाती है. ये है फिल्म मेला से
रफ़ी और लता का गया हुआ गीत.

श्रेणी प्रेमियों के लिए सूचना–ये पर्यावरण प्रेमी गीत है. इसमें बाग,
खेत वगैरह बहुत सी चीज़ों का जिक्र है. श्रेणी बनाने वाले तो एक
शब्द पर भी श्रेणी बनाया करते हैं-जैसे “रुत-सोंग”, ‘मिलन-सोंग”,
“साथी सोंग’ इत्यादि. ये कसरत कुछ संगीत फोरम, ग्रुप में नियमित
रूप से होती मिलेगी आपको. एक फायदा इसका ये होता है कि
गाना याद रखें के लिए आपके पास नया बहाना हो जाता है. कुछ
गीत केवल श्रेणी बनाते वक्त ही याद किये जाते हैं इन्हें सुनने का
उपक्रम अधिक नहीं होता.

गीत मजरूह ने लिखा और इसकी धुन बनाई आर डी बर्मन ने जिसे
संजय खान और मुमताज़ पर फिल्माया गया है.



गीत के बोल:

रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे
रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे
मोहे कहीं ले चल बाहों के सहारे
बागों में, खेतों में, नदिया किनारे
रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे

हो कोई सजनवा आ जा
तेरे बिना ठंडी हवा सही न जाए
आ जा ओ आ जा

रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे
मोहे कहीं ले चल बाहों के सहारे
हाँ, बागों में, खेतों में, नदिया किनारे
रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे

हो, जैसे रुत पे छाई हरियाली
गहरी होई मुख पे रंगत नेहा की
खेतों के संग झूमे पवन में
फुलवा सपनों के, डाली अरमां की
तेरे सिवा कछु सूझे नाहीं, अब तो सांवरे
रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे
मोहे कहीं ले चल बाहों के सहारे
बागों में, खेतों में, नदिया किनारे
रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे

ओ ओए सजनिया जान ले ले कोई मोसे
अब तो लागे नैना तोसे
आ जा ओ आ जा

ओ, मन कहता है दुनिया तज के
जानी बस जाऊं तेरी आँखों में
और मैं गोरी, महकी महकी
घुल के रह जाऊं, तेरी साँसों में
हो, इक दूजे में यूँ खो जाएँ, जग देखा करे
रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे
मोहे कहीं ले चल बाहों के सहारे
बागों में, खेतों में, नदिया किनारे
रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे
रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे
................................................................................
Rut hai Milan ki-Mela 1972

Read more...

Apr 19, 2015

प्यार के बंधन में बंध गए-दामन और आग १९७३

आपको सन १९७३ की फिल्म दामन और आग से
एक गीत सुनवाया था सन २०११ में. आइये सुनते
हैं वन फिल्म वंडर विनोद कुमार निर्देशित फिल्म
से दूसरा गीत.

गीत लता मंगेशकर का गाया हुआ है, बोल हसरत
के हैं और धुन शंकर जयकिशन की. संजय खान
और सायरा बानो अभिनीत इस फिल्म के चर्चे
नहीं हुए क्यूंकि फिल्म कब आई कब गयी जनता
को पता ही नहीं चला.

सन १९७३ की हिट फ़िल्में कुछ इस प्रकार से हैं-
बोबी, दाग, जुगनू, नमक हराम, यादों की बारात,
धर्मा, आ गले लग जा, अनहोनी, कहानी किस्मत की,
हीरा और मनचली. ये साल मुख्यतः धर्मेन्द्र के नाम
ही रहा और अमिताभ बच्चन के धमाकेदार आगाज़
के लिए चर्चित हुआ. फिल्मों के नाम से ही अंदाजा
लग जाता है किसका संगीत लोकप्रिय रहा. अपवाद
रहे तो केवल राहुल देव बर्मन जिनका फिल्म जोशीला,
अनामिका, हीरा पन्ना फिल्मों का संगीत बजता रहा
फिल्मों के चलने या न चलने के गणित से परे. 

ये पुराने संगीतकारों के लिए ढलान का वर्ष था और
नहीं भी. शंकर जयकिशन के चर्चे कम हो गए तो
सचिन देव बर्मन ने अभिमान से अपने झंडे गाडे
रखे. कल्याणजी आनंदजी के लिए वर्ष अच्छा रहा.
लक्ष्मी प्यारे के लिए भी ये वर्ष ऊंचाइयां छूने वाला
रहा और बॉबी और दाग जैसी फिल्मों के संगीत ने
धूम मचा दी.

आइये गीत सुना जाए, सन १९७३ पर चर्चा फिर कभी.



गीत के बोल:

......................................वफ़ा से भी नहीं डरते
सितम से, ज़ुल्म से, जोर-ओ-ज़फा से भी नहीं डरते
ज़माना क्या डराएगा मोहब्बत करने वालों को
मोहब्बत करने वाले तो खुदा से भी नहीं डरते

प्यार के बंधन में बंध गए दो दिल
प्यार के बंधन में बंध गए दो दिल
अब खैर जो होगा देखा जायेगा
अब खैर जो होगा देखा जायेगा

प्यार के बंधन में बंध गए दो दिल
प्यार के बंधन में बंध गए दो दिल
अब खैर जो होगा देखा जायेगा
अब खैर जो होगा देखा जायेगा

ज़ुल्म सदियों से होता रहा है
प्यार हर युग में रोता रहा है
ज़ुल्म सदियों से होता रहा है
प्यार हर युग में रोता रहा है
बागबान की इनायत तो देखो
दिल में कांटे चुभोता रहा है
दिल में कांटे चुभोता रहा है
प्यार में बगावत भी हो गयी शामिल
प्यार में बगावत भी हो गयी शामिल
अब खैर जो होगा देखा जायेगा
अब खैर जो होगा देखा जायेगा

हम ज़माने अब न डरेंगे
दिल जो चाहेगा वो ही करेंगे
हम ज़माने अब न डरेंगे
दिल जो चाहेगा वो ही करेंगे
दूसरों के लिए भी रहे खिल
अब तो अपने ही लिए मरेंगे 
अब तो अपने ही लिए मरेंगे 
मौत को बना लेंगे अपनी मंजिल
मौत को बना लेंगे अपनी मंजिल 
अब खैर जो होगा देखा जायेगा
अब खैर जो होगा देखा जायेगा

प्यार के बंधन में बंध गए दो दिल
प्यार के बंधन में बंध गए दो दिल
अब खैर जो होगा देखा जायेगा
अब खैर जो होगा देखा जायेगा
...........................................................
Pyar ke bandhan mein-Daman aur aag 1973

Read more...

May 15, 2011

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर-दामन और आग १९७३

कुछ शब्दों का साथ ऐसा लगता है मानो-made for each other,
जैसे 'साबुन और झाग'। शब्दों के ऐसे युग्मों का प्रयोग फिल्म
के नाम ईजाद करने में अक्सर किया जाता है।

आइये आपको बिना समय गंवाए एक गीत सुनाया जाये।
इस मधुर युगल गीत को गाया है रफ़ी के साथ आशा भोंसले ने।
शंकर जयकिशन के संगीत के बावजूद इस फिल्म ने कोई
करिश्मा नहीं किया जिससे इसके निर्माता निर्देशक की लागत
और मेहनत वसूल हो। गीत में जो कलाकार दिखलाई पढ़ रहे हैं
उनके नाम इस प्रकार से हैं, नायक:संजय खान, नायिका:सायरा बानो।



गीत के बोल:

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम
ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम
कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम

मेरा सपना हुआ पूरा जो मुलाक़ात हुयी
प्यार से प्यार मिला प्यार की कुछ बात हुयी
मेरा सपना हुआ पूरा जो मुलाक़ात हुयी
प्यार से प्यार मिला प्यार की कुछ बात हुयी
जिसको पाया है दुआ ने वोही तासीर हो तुम
जिसको पाया है दुआ ने वोही तासीर हो तुम

कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम
ऐसा लगता है मेरे प्यार की तकदीर हो तुम

मेरे साथी मुझे जीने का सहारा तो मिला
मेरी भटकी हुयी नैया को किनारा तो मिला
मेरे साथी मुझे जीने का सहारा तो मिला
मेरी भटकी हुयी नैया को किनारा तो मिला
जो मेरे हाथ पे लिखी है वो तहरीर हो तुम
जो मेरे हाथ पे लिखी है वो तहरीर हो तुम

कल जो देखा था उसी ख्वाब की ताबीर हो तुम

मुस्कुराती हुई एक हुस्न की तस्वीर हो तुम
................................................................
Muskurati huyi ek husn ki-Daman aur aag 1973

Read more...

Dec 10, 2010

वादियाँ मेरा दामन १ -अभिलाषा १९६८

अब कुछ डाक्युमेंट्री वाले अंदाज़ में विवरण हो जाए
तो कैसा रहे। तो शुरू किया जाए-ये फिल्म अमित बोस ने
डायरेक्ट की है। इस फिल्म की कहानी सतीश भटनागर
ने लिखी है। इस फिल्म में संजय खान हीरो हैं और नंदा
हेरोइन। संजय खान के चरित्र का नाम अरुण है तो नंदा
के चरित्र का नाम रितु। संजय खान जैसा कि आप जानते
ही होंगे नायक फिरोज खान के छोटे भाई हैं। संजय से
छोटा एक और भाई है जिसका नाम है-अकबर खान।
अभिनेत्री नंदा के भाई बहनों की जानकारी नहीं है। गीत
में आप एक कार भी देखेंगे बड़ी सी, जिसका मॉडल पता
नहीं है, गूगल पर सर्च करना पड़ेगा। एक पहाड़ी सी दिखने
रही है जिसपर नायक नायिका दिखाई दे रहे हैं। थोड़े
बहुत संवाद बोलने के बाद नायक गाना गाने लगता है।
नायिका को संवाद का आखिरी हिस्सा पसंद नहीं आया
और वो उससे दूर भाग खड़ी होती है। ज़ाहिर सी बात है कि
अपने मुंह मियां मिट्ठू कोई बनेगा तो कहाँ से सुहाएगा
किसी को। अब आपको गीत के बाकी विवरण देखना हो
तो जैसे डाक्युमेंट्री के अंत में आते हैं उसी अंदाज़ में गाने
के टैग पढ़ डालिए, आपको मालूम पढ़ जायेगा कि गीत में
किस किस ने अपना योगदान दिया है । सर्वप्रथम आएगा
फिल्म किस सन में प्रकट हुई, फिर आएगा गीतकार का नाम,
उसके बाद गायक, नायिका, संगीतकार और अंत में मिलेगा
फिल्म के नायक का नाम।





गीत के बोल:

वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें
जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे।
वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें
जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे।

वादियाँ मेरा दामन

जब चुराओगे तन तुम किसी बात से
जब चुराओगे तन तुम किसी बात से
शाख-ए-गिल छेड़ देगी मेरे हाथ से
अपनी ही ज़ुल्फ़ को और उलझोगे

वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें
जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे।

वादियाँ मेरा दामन

जबसे मिलने लगीं तुमसे राहें मेरी

जबसे मिलने लगीं तुमसे राहें मेरी
चाँद सूरज बनी दो निगाहें मेरी
तुम कहीं भी रहो तुम नज़र आओगे।

वादियाँ मेरा दामन रास्ते मेरी बाहें
जाओ मेरे सिवा तुम कहाँ जाओगे।

वादियाँ मेरा दामन
...................................................

Wadiyan Mera Daaman-Abhilasha 1968

Read more...

Sep 30, 2010

गोरी के हाथ में-मेला १९७२

ग्रामीण पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्में समय समय पर अवतरित हुईं हमारे सिनेमा हाल
में। गाँव के मेले को आकर्षक बनाने के लिए एक आध हीरो हीरोइन की ज़रुरत ज़रूर
पड़ती है। ये गीत है फिल्म मेला से । फिल्म ठीक ठाक थी मगर उल्लेक्नीय फिल्मों
की सूची में शामिल नहीं की जाती। गीत की खूबी इसकी धपर- धिपिर टपर- टिपिर
वाली थाप है। नृत्य में आपको देसीपन का आभास अवश्य होगा। संजय खान और
मुमताज़ पर फिल्माया गया गीत गाया है लता और रफ़ी ने। इसकी धुन बनायीं है
राहुल देव बर्मन ने। मजरूह सुल्तानपुरी ने इसके बोल लिखे हैं। मटकों-चटको
डांस करने के लिए धुन उपयुक्त है। सेट पर सजी दुकान के ऊपर जो बोर्ड लगा है
वो अवश्य गौर करने लायक है-सुगन्धित भण्डार। आपने अभी तक सुगंधी भण्डार या
सुगंध भंडार नाम सुने होंगे मगर यहाँ तो पूरी दुकान ही सुगन्धित है।



गीत के बोल:

गोरी के हाथ में
जैसे ये छल्ला
वैसी हो किस्मत
मेरी भी अल्लाह

गोरी के हाथ में
जैसे ये छल्ला
वैसी हो किस्मत
मेरी भी अल्लाह

छूने न दूँगी ऊँगली मैं बाबू
बन जाओ चाहे चांदी का छल्ला

छूने न दूँगी ऊँगली मैं बाबू
बन जाओ चाहे चांदी का छल्ला

जा रे जा रे
हाथ को हमारे, हाथ लगा न
हो, दिल्लगी न समझना
कोई लुटे कोई मर मिटे
जग हो दीवाना
हो, मैं जो बनूँ तेरा गहना
तू जो बने गहना संवारना छोड़ दूं
मोहे तू सजाये तो दरपन तोड़ दूं
हो, ऐसा गुस्सा भई रे वल्लाह

गोरी के हाथ में
जैसे ये छल्ला
वैसी हो किस्मत
मेरी भी अल्लाह

छूने न दूँगी
छूने न दूँगी
ऊँगली मैं बाबू
ऊँगली मैं बाबू
बन जाओ चाहे चांदी का छल्ला

चाहूँ तुझे डोली में बिठा के कहीं ले जाऊं
ऐ हाय सोच में पड़ गई क्या
जो मैं तेरी दुलहनिया बनूँ घूँघट जला दूं
ओ हाय ये मैं कह गई क्या
जो मैं चाहूँ रे तू भी वो ही चाहे
फिर तू ज़ालिम सताए मुझे काहे
हो जा जा इतना तू न चिल्ला

छूने न दूँगी ऊँगली मैं बाबू
बन जाओ चाहे चांदी का छल्ला

गोरी के हाथ में
गोरी के हाथ में
जैसे ये छल्ला
जैसे ये छल्ला
वैसी हो किस्मत
मेरी भी अल्लाह

छूने न दूँगी
छूने न दूँगी
ऊँगली मैं बाबू
ऊँगली मैं बाबू
बन जाओ चाहे चांदी का छल्ला

Read more...

Nov 23, 2009

उलझन सुलझे ना -धुंध १९७३

एक जगह मैं अभिनेत्री रेखा द्वारा लिखी हुई जीनत अमान की
संक्षिप्त जीवनी पढ़ रहा था। उसमे एक सटीक टिप्पणी की हुई
है जीनत अमान के बारे में-"जीनत अमान ने सिनेमा में नारी
के चित्रण में आमूल-चूल परिवर्तन करा दिए "। काफ़ी हद तक
सही है। इसके अलावा भी कुछ है जिसका जिक्र हमें अवश्य
करना चाहिए। वो है फैशन में बदलाव । सही मायने में ५० के
दशक की बड़ी बड़ी आँखों वाली सुंदरी नलिनी जयवंत अगर हिन्दी
सिनेमा की पहली फैशन क्वीन थी तो जीनत अमान दूसरी।
जीनत अमान अपनी स्क्रीन प्रेसेंस के लिए जानी जाती थीं।
सारे छायाकार उनसे खुश रहते थे-वजह उनके चित्र बहुत ही
सहज और स्वाभाविक होते थे। ये बात स्थिर-चित्र और चलचित्र
दोनों पर सामान रूप से लागू है।

उसके अलावा बॉलीवुड में बदलाव लाने वाली अभिनेत्रियाँ बहुत
कम हैं। ढर्रे पर चलने वाले नाम बहुत से हैं। इस पीड़ी से
प्रिटी जिंटा एक नाम है जिसने बॉलीवुड में अलग सी हलचल
मचाई।

आइये वापस गीत कि ओर चलें जो प्रस्तुत होने जा रहा है
इधर। ये फ़िल्म धुंध से है। इसमे जीनत ने एक अजीब सी
मानसिक दशा वाले अपाहिज रईस की पत्नी कि भूमिका निभाई
है। बी आर चोपड़ा ने एक उत्तम फ़िल्म बनाई है जिसमे सभी
कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया है। डैनी डेंगजोप्पा ने इसमे
अविस्मर्णीय भूमिका निभाई है। हिन्दी सिनेमा के सबसे अच्छे
कलाकारों में उनका नाम इतिहास में हमेशा आदर से लिया
जाएगा। इस गीत के बोल लिखे हैं साहिर लुधियानवी ने और
धुन बनाई है रवि ने और गीत गाया हैं आशा भोंसले ने ।

अगर आपको पोस्ट पसंद आई है तो अपनी टिप्पणी अवश्य
छोड़ें ।



गाने के बोल:

उलझन सुलझे ना
रास्ता सूझे ना
जाऊं कहाँ मैं
जाऊं कहाँ

उलझन सुलझे ना
रास्ता सूझे ना
जाऊं कहाँ मैं
जाऊं कहाँ

मेरे दिल का अँधेरा
हुआ और अँधेरा
कुछ समझ ना पाऊँ
क्या होना है मेरा
मेरे दिल का अँधेरा
हुआ और अँधेरा
कुछ समझ ना पाऊँ
क्या होना है मेरा


खड़ी दोराहे पर
ये पूछूं घबरा कर
खड़ी दोराहे पर
ये पूछूं घबरा कर

जाऊं कहाँ मैं
जाऊं कहाँ

उलझन सुलझे ना
रास्ता सूझे ना
जाऊं कहाँ मैं

जाऊं कहाँ

जो साँस भी आए
तन चीर के जाए
इस हाल से कोई
किस तरह निभाए
जो साँस भी आए
तन चीर के जाए
इस हाल से कोई
किस तरह निभाए

ना मरना रास आया
ना जीना मन भाया
ना मरना रास आया
ना जीना मन भाया

जाऊं कहाँ मैं
जाऊं कहाँ

उलझन सुलझे ना
रास्ता सूझे ना
जाऊं कहाँ मैं
जाऊं कहाँ

रुत गम की टले ना
कोई आस फले ना
तकदीर के आगे
मेरी पेश चले ना
रुत गम की टले ना
कोई आस फले ना
तकदीर के आगे
मेरी पेश चले ना
बहुत की तदबीरें
ना टूटी जंजीरें
बहुत की तदबीरें
ना टूटी जंजीरें

जाऊं कहाँ मैं
जाऊं कहाँ

उलझन सुलझे ना
रास्ता सूझे ना
जाऊं कहाँ मैं
जाऊं कहाँ
..........................................................
Uljha suljhe na-Dhundh 1973

Read more...

Nov 22, 2009

हम तुम्हारे लिए-इंतकाम १९६९

लता और रफ़ी ने करीब ४२५ युगल गीत गाये हैं। ये आंकड़ा आपको
शायद बार बार देखने को मिले। पिछली एक पोस्ट में हमने फ़िल्म
इंतकाम के चर्चा करी थी। इस बार ये गाना जो है वो एक युगल गीत
है और फ़िल्म के हीरो और हिरोइन पर फिल्माया गया है। अगर इस फ़िल्म
का संगीत रवि द्वारा तैयार किया गया होता तो शायद गायिका आशा भोंसले
होती । याद कीजिये फ़िल्म एक फूल दो माली के गाने।

 जानकारी इकठ्ठा करने के शौक़ीन ऊपर दिए आंकडे को नोट कर सकते
हैं. इस ब्लॉग के हिंदी जुमलों का अनुवाद आपको शायद अंग्रेजी में
दूसरी  जगह मिल जाए तो चौंकियेगा मत.

ये लोकप्रिय युगल गीत है और झुमरी तलैया, बरकाकाना, मजनू का टीला
वगैरह से इस गाने के लिए विविध भरती पर कई फरमाइशें आती थी एक
ज़माने में। ७० के दशक के आते आते हिरोइन के सर पर जो चिड़िया के
घोंसले सा विग होता था वो गायब होने लगा। ये गीत राजेंद्र कृष्ण का लिखा
हुआ है और इसकी धुन बनाई है लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल ने ।



गाने के बोल:

हम तुम्हारे लिए, तुम हमारे लिए
हम तुम्हारे लिए, तुम हमारे लिए
फ़िर जमाने का क्या है, हमारा ना हो

आप के प्यार का, जो मिले आसरा
आप के प्यार का, जो मिले आसरा
फ़िर खुदा का भी बेशक सहारा ना हो

हम तुम्हारे लिए, तुम हमारे लिए

तुम ही हो दिल में, तुम ही हो मेरी निगाहों में
न और आयेगा अब कोई मेरी राहों में
करूं ना आरजू
करूं ना आरजू, मरने के बाद जन्नत की
अगर ये जिंदगी गुजरे तुम्हारी बाहों में
तुम्हारी बाहों में
प्यार के चाँद से, रात रोशन रहे
प्यार के चाँद से, रात रोशन रहे
फ़िर कोई आसमान पे सितारा ना हो

हम तुम्हारे लिए, तुम हमारे लिए

नजर नजर से, कदम से कदम मिलाते हुए
चले हैं वक्त की रफ़्तार को भुलाए हुए
बहार पूछ रही है
बहार पूछ रही है, चमन के फूलों से
ये कौन आया के तुम सब हो सर ज़ुकाए हुए
हो सर ज़ुकाए हुए
सोच में फूल है, हम अगर चल दिए
फ़िर चमन में कभी ये नजारा ना हो

हम तुम्हारे लिए, तुम हमारे लिए
फ़िर जमाने का क्या है, हमारा ना हो

आप के प्यार का, जो मिले आसरा
फ़िर खुदा का भी बेशक सहारा ना हो

हम तुम्हारे लिए, तुम हमारे लिए
हम तुम्हारे लिए, तुम हमारे लिए
...................................................................
Ham tumhare liye-Inteqam 1969

Read more...

ये परदा हटा दो-एक फूल दो माली १९६९

१९६९ में ही संजय खान और साधना की एक और फ़िल्म आई थी उसका
नाम -एक फूल दो माली है। इस फ़िल्म का एक युगल गीत बहुत बजा है
-ये परदा हटा दो। जिन हिन्दी गानों में 'नाना' शब्द आया है वो गिनती के
ही हैं। इस गाने में डंडे का भी जिक्र है - डंडे से अरमान कैसे ठंडे होते ?

जिस परदे का जिक्र गाने में हो रहा है उसको मैं अभी तक ढूंढ रहा हूँ। गीत
गाया है आशा भोंसले और रफ़ी ने । संगीतकार हैं रवि।



गाने के बोल:

ये परदा हटा दो
ज़रा मुखड़ा दिखा दो

ये परदा हटा दो
ज़रा मुखड़ा दिखा दो

हम प्यार करनेवाले हैं कोई गैर नहीं
अरे, हम तुमपे मरनेवाले हैं कोई गैर नहीं

ओ मजनू के नाना
मेरे पीछे न आना
जा प्यार करने वाले तेरी खैर नहीं
अरे ओ हमपे मरने वाले तेरी खैर नहीं

शुकर करो के पड़े नहीं हैं मेरी माँ के डंडे
एक हाथ में हो जाते अरमान तुम्हारे ठंडे
शुकर करो के पड़े नहीं हैं मेरी माँ के डंडे
एक हाथ में हो जाते अरमान तुम्हारे ठंडे

माँ को भी समझा दो
बस इतना बता दो

हम प्यार करनेवाले हैं कोई गैर नहीं
अरे, हम तुमपे मरनेवाले हैं कोई गैर नहीं
ओ मजनू के नाना
मेरे पीछे न आना
जा प्यार करने वाले तेरी खैर नहीं
अरे ओ हमपे मरने वाले तेरी खैर नहीं

जहाँ मिले दो जवान नज़र होती तकरार वहीँ है
दिल पर रख कर हाथ ये कह दो हमसे प्यार नहीं है
जहाँ मिले दो जवान नज़र होती तकरार वहीँ है
दिल पर रख कर हाथ ये कह दो हमसे प्यार नहीं है

दिल की बातें दिलवाले नज़रों से ही पहचानते
लेकिन कुछ ऐसे हैं अनादी जो ये भी न जानते
ये पहले बताते
बारात लेके आते

हम प्यार करनेवाले हैं कोई गैर नहीं
अरे, हम तुमपे मरनेवाले हैं कोई गैर नहीं

ओ मजनू के नाना

हम प्यार करनेवाले हैं कोई गैर नहीं
अरे, हम तुमपे मरनेवाले हैं कोई गैर नहीं

ये परदा हटा दो
.................................................................
Ye parda hata do-Ek phool do mali 1969

Read more...

Nov 15, 2009

क्या सोच रहा रे-मेला १९७२

इस गीत को सर्वप्रथम मैंने दूरदर्शन के कार्यक्रम चित्रहार में देखा था।
तभी से मैं इस गाने का मुरीद हूँ। मुमताज़ के भाव इस गाने में गज़ब के हैं।
ये उस दौर की फ़िल्म है जब मुमताज़ बी ग्रेड की फिल्मों की हिरोइन के लेबल
से निकलकर शीर्ष की अभिनेत्रियों में शामिल हो गई थी। डाकुओं के विषय पर
बनी फ़िल्म मेला में कई मधुर गीत हैं। फ़िल्म ज्यादा नहीं चली मगर इसके
गीत बजते रहे नियमित रूप से। ये गीत थोड़ा कम बजा इसलिए इसको सबसे
पहले इस ब्लॉग पर शामिल कर रहा हूँ। नायक हैं संजय खान मुमताज़ के
साथ, इस गीत में। बोल मजरूह सुल्तानपुरी के हैं, गायिका लता मंगेशकर हैं
और संगीत है राहुल देव बर्मन का.



गाने के बोल:

जा ना
जा जा

का रे बाबू

क्या सोच रहा रे
हाँ, क्या सोच रहा रे
जा ना, जा जा ना
ले जा मेरा प्यार तेरे काम आएगा

क्या सोच रहा रे
सोच रहा रे
जा ना, जा जा ना
ले जा मेरा प्यार तेरे काम आएगा

तुझे सहर जाना है, रंगीली गलियों में
भंवर बन के घूमेगा कागज़ की कलियों में

तुझे सहर जाना है, रंगीली गलियों में
भंवर बन के घूमेगा कागज़ की कलियों में

लेगी दिल बातों ही बातों में कोई सहरी गुडिया
फ़िर जिस दिन चुपके से चल देगी वो उड़ती चिडिया

उसी दिन तेरे मुख पे मेरा ही नाम आएगा

सोच रहा रे
हाँ, क्या सोच रहा रे
जा ना, जा जा ना
ले जा मेरा प्यार तेरे काम आएगा


मोहे पता इतना है ओ रे बनके छैला
तन के उजले लोगों से जब होगा मन मैला

फ़िर बेकल हो हो के रो रो के बीतेंगी रतियाँ
सोऊँगी रे मैं तो, सोचेगा तू मेरी बतियाँ

मेरा नहीं रे पहले तेरा सलाम आएगा

सोच रहा रे
हाँ, क्या सोच रहा रे
जा ना, जा जा ना
ले जा मेरा प्यार तेरे काम आएगा

क्या सोच रहा रे
जा ना, जा जा ना
ले जा मेरा प्यार तेरे काम आएगा

Read more...

Jul 16, 2009

नटखट नगमे -सैयां ले गई जिया - एक फूल दो माली १९६९

इस फ़िल्म में हीरो हीरोइन दोनों के बीच खूबसूरती का
मुकाबला सा होता प्रतीत होता है। हा हा हा । ये गाना
एक ज़माने में 'आल इंडिया रेडियो' की सारी सर्विसेस पर
तबीयत से बजा करता था। आशा के गाये जिंदादिल गीतों
में से एक। इसको संगीतबद्ध किया है संगीतकार रवि ने.
इसका वीडियो जब तक मैंने नहीं देखा था तब तक मुझे
यही लगता रहा कि ये शशिकला या जयश्री टी. जैसी हीरोइन
पर फिल्माया गया होगा।

इस गाने में साधना ने अपना नृत्य कौशल और अभिनय
सभी का प्रदर्शन कर दिया है। साधना सम्मोहक मुस्कान
की स्वामिनी रही हैं। इस गाने में उनको मुस्कुराने का
भरपूर मौका दिया गया है।



गाने के बोल :

सैयाँ ले गई जिया तेरी पहली नज़र
कैसा जादू किया तूने मो पे ओ जादूगर
सैयाँ ले गई ...

पहले, लगा तो इक सपना सा
अब तो, लग तू मोहे अपना सा
ले चल हाथ पकड़ के सजना चाहे जिधर
सैयाँ ले गई ...

आ गई, बलम तेरी बातों में
क्या है, न जाने तेरी आँखों में
भूल गई मैं, प्यार में तेरे, अपनी डगर
सैयाँ ले गई ...

जानूं, कि तू हरजाई है
सोचूँ ,क्यूँ आँख मिलाई है
लेकिन तुझको देख रही ना अपनी ख़बर
सैयाँ ले गई ...
................................................................
Saiyan le gayi jiya-Ek phool do mali 1969

Read more...

Apr 29, 2009

वक्त करता जो वफ़ा-दिल ने पुकारा १९६७

कुछ गीत शाश्वत गीतों की श्रेणी में आते हैं। समय के बंधन से
मुक्त ये गीत कभी भी सुने जाएँ हमेशा ताज़े ही लगते हैं। हिंदी
फिल्म संगीत जगत में हर संगीतकार ने कुछ विलक्षण गीत बनाये
हैं। गायक मुकेश की प्रतिभा का उपयुक्त दोहन कल्याणजी आनंदजी
ने सबसे ज्यादा किया है। शंकर जयकिशन ने मुकेश से गीत गवाए
इसकी एक बड़ी वजह राज कपूर थे जिनके ऊपर फिल्माये गए गीत
१०-१५ गीतों को छोड़ कर सभी मुकेश के गाये हुए हैं।

फ़िल्म 'दिल ने पुकारा' का ये गीत संगीतकार ने ज़रूर फुरसत में
बनाया था। इसे सुनकर दिल दुखी जरूर होता है हर बार। ऐसे गीतों
में हर चीज़ नपी तुली सी मालूम पड़ती है जैसे कोई ईश्वरीय निर्देश
पर काम किया गया हो। इस गीत में जो कलाकार हैं उनके नाम इस
प्रकार से हैं-शशि कपूर, राजश्री और संजय खान ।



गीत के बोल:

वक्त करता जो वफ़ा
वक्त करता जो वफ़ा
आप हमारे होते
हम भी औरों की तरह
हम भी औरों की तरह
आपको प्यारे होते

वक्त करता जो वफ़ा

अपनी तकदीर में पहले ही से कुछ तो गम हैं
अपनी तकदीर में पहले ही से कुछ तो गम हैं
और कुछ आपकी फितरत में वफ़ा भी कम है
वरना जीते हुई बाज़ी तो न हारे होते

वक्त करता जो वफ़ा
आप हमारे होते

वक्त करता जो वफ़ा

हम भी प्यासे हैं ये साक़ी को बता भी न सके
हम भी प्यासे हैं ये साक़ी को बता भी न सके
सामने जाम था और जाम उठा भी न सके
काश हम गैरत-ऐ-महफ़िल के मारे न होते

वक्त करता जो वफ़ा
आप हमारे होते

वक्त करता जो वफ़ा

दम घुटा जाता है सीने में फ़िर भी जिंदा हैं
दम घुटा जाता है सीने में फ़िर भी जिंदा हैं
तुमसे क्या हम तो ज़िन्दगी से भी शर्मिंदा हैं
मर ही जाते न जो यादों के सहारे होते

वक्त करता जो वफ़ा
आप हमारे होते
हम भी औरों की तरह
हम भी औरों की तरह
आपको प्यारे होते

वक्त करता जो वफ़ा

Read more...
© Geetsangeet 2009-2020. Powered by Blogger

Back to TOP