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Jun 9, 2016

रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे-गुलाब गैंग २०१४

पारंपरिक गीत और लोक गीत हमेशा समय के साथ आप
सुनाई देते रहेंगे चाहे फिल्मों में हों या न हों. आजकल एक
ट्रेंड चला हुआ है हर दुसरे लोक गीत में फ्लैंजर डालने का
जिससे सुनने का मजा किरकिरा हो जाता है. ये फ्लैंजर नाम
की बीमारी सन २००० की आसपास सुनाई दी थी पहले. इसका
उपयोग पहले भी होता आया है मगर अधिकतर गिटार के
साथ. गाने वाले की आवाज़ के साथ ये मिलेनियम की ही
देन है. ये अंग्रेजी गीतों से उड़ा, हिंदी गीतों से गुजर कर
लोक गीतों में जा चिपका.

आज सुनते हैं एक फ़िल्मी लोक गीत जो फ्लैंजर मुक्त हैं. शुद्ध
गायकी है, वाद्य यंत्रों की मिलावट भी कम है इसमें. ये गीत है
फिल्म गुलाब गैंग से जिसे तीन गायक कलाकारों ने गाया है-
स्नेहलता दीक्षित, अनुपमा राग और माधुरी दीक्षित ने. संगीत
तैयार किया है सौमिक सेन ने. अब तक सेन संगीतकार जिन्हें
आप सुन चुके हैं ब्लॉग पर, नाम हैं -जमाल सेन, शम्भू सेन,
दिलीप सेन-समीर सेन, पलाश सेन, सोहेल सेन. ये सातवें हैं.



गीत के बोल:

रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया

रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे
रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे

जाओ जी जाओ, करो ना बतियाँ
जाओ जी जाओ, करो नाही बतियाँ
जाओ जी जाओ, करो ना बतियाँ
ऐ जी बाली
ऐ जी बाली है मोरी उमरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे

रंगी सारी गुलाबी पेटीकोटीया रे
रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे
पहनी सारी गुलाबी चुनरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे
रंगी सारी
पहनी सारी गुलाबी चुनरिया रे
मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे
..................................................................
Rangi saari gulabi-Gulaab gang 2014

Artists-Madhuri Dixit, Juhi Chawla

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Mar 30, 2016

धक् धक् करने लगा-बेटा १९९२

जिस गीत ने माधुरी दीक्षित को धक् धक् गर्ल बनाया वो गीत
आज सुनेंगे और देखेंगे. उसके पहले तक वे १-२-३ गर्ल के नाम
से भी जानी जाती थीं. ये १-२-३ की गिनती वाला गीत भी बेहद
लोकप्रिय हुआ था जो फिल्म तेज़ाब में था. संयोग से इस फिल्म
में भी अनिल कपूर ही नायक थे माधुरी के साथ.

ऊह आह आउच सीरीज़ वाला ये गीत ज़बरदस्त हिट गीत है और
आज भी कभी कभी सुनाई दे जाता है. इसे जनता माइलस्टोन
सोंग कहती है. माइलस्टोन सोंग वो जो माइल-माइल किलोमीटर-
किलोमीटर पर बजता मिले. ये एक समय हर गली नुक्कड़ पर
बजा करता था.

गीत समीर ने लिखा है और इसकी तर्ज़ बनायीं है आनंद मिलिंद
ने. आनंद मिलिंद के लिए तो ९० का दशक शानदार रहा है और
ये फिल्म उनकी बड़ी हिट फिल्मों में से है. रोजी रोटी वाली फ़िल्में
उन्होंने बहुत की हैं, ये केक-पेस्ट्री वाली फिल्म थी.



गीत के बोल:


आउच
हो धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा
अरे रे धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा
सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ ना
सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ ना

दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
तू है मेरी दिलरुबा क्या लगती है, वाह रे वाह
तू है मेरी दिलरुबा क्या लगती है, वाह रे वाह

धक-धक करने लगा, हो मोरा जियरा डरने लगा

अपना कहा जो पिया तूने मुझे
मैं मीठे-मीठे सपने सजाने लगी
देखा मेरी रानी जब मैंने तुझे
मेरी सोई-सोई धड़कन गाने लगी
जादू तेरा छाने लगा
मेरी नस-नस में समाने लगा
ख़ुद को मैं भुलाने लगा
तुझे साँसों में बसाने लगा
रिश्ता, अब ये रिश्ता
साथी टूटेगा न तोड़े कभी

दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
अरे रे धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा

उलझी है काली-काली लट तेरी
ज़रा इन ज़ुल्फ़ों को सुलझाने तो दे
इतनी भी क्या है जल्दी तुझे
घड़ी अपने मिलन की तु आने तो दे
ऐसे न बहाने बना, मेरी रानी
अब तो बाहों में आ
ऐसे न निगाहें मिला
कोई देखेगा तो सोचेगा क्या
मस्ती छाई है मस्ती
आके लग जा गले से अभी

धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा
धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा

सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ ना
सैंया बैंया छोड़ ना, कच्ची कलियाँ तोड़ ना

दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
तू है मेरी दिलरुबा क्या लगती है, वाह रे वाह
तू है मेरी दिलरुबा क्या लगती है, वाह रे वाह

धक-धक करने लगा हो मोरा जियरा डरने लगा
दिल से दिल मिल गया मुझसे कैसी ये हया
……………………………………………………….
Dhak dhak karne laga-Beta 1992

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Nov 29, 2015

फूल मांगूं न बहार मांगूं-राजा १९९५

आपको आज एक और गीत सुनवाते हैं जो है फिल्म
राजा से. इस फिल्म के गीत काफी बजे हैं और अभी
भी बजते मिल जाते हैं. १९९५ की इस फिल्म को पूरे
दो दशक हो चुके हैं रिलीज़ के बाद. अब तो इसके गीत
भी पुराने हो चले हैं. समीर ने फिल्म के गीत लिखे हैं
और नदीम श्रवण ने संगीत तैयार किया है. प्रस्तुत गीत
को गाया है अलका याग्निक संग उदित नारायण ने.

अभिनेता संजय कपूर और माधुरी दीक्षित अभिनीत इस
फिल्म को देख के कुछ जुमले सुनने को मिले थे फिल्म
रिलीज़ के वक्त-अमां यार कोई और नई मिला था हीरो के
लिए, हमको ही ले लेते फिलिम में. भाषा से आप समझ
ही गए होंगे कौन से इलाके की बात हो रही है.

संजय कपूर उतने बुरे अभिनेता नहीं हैं जितना जनता ने
उन्हें समझा था. उनके चेहरे पर एक स्थायी सौम्यता का
भाव है जो आम तौर नायकों के चेहरों पर आपको नहीं
मिलेगा. कुछ हद तक ये भाव अनिल कपूर के चेहरे पर
भी हुआ करता था किसी समय तक. संजय कपूर ने एक
दो फिल्मों में नेगेटिव किरदार भी बखूबी निभाए हैं लेकिन
प्रसिद्धि उनके प्रारब्ध में कम दिखाई दी और वे जल्द ही
फिल्मों से गायब हो गए.

माधुरी दीक्षित कुछ ज्यादा ही मुस्कुरा रही हैं इस गीत में
जैसे एक साथ ९-१० चुटकुले सुना दिए गए हों उनको गाने
के फिल्मांकन के पूर्व. उनकी मुस्कान उनके कैरियर के
पूर्वार्ध में ज्यादा सहज हुआ करती थी. उत्तरार्ध में थोडा सा
खिसियानापन आता गया जो किसी किसी फ्रेम में दिखाई
भी दे जाता है अगर आप गौर से देखें. फिल्म हिफाज़त
वाली माधुरी आगे कहीं खो सी गई.वैसे इस फिल्म में अभिनय
की कमान माधुरी के हाथ में ही है 




गीत के बोल:

फूल मांगूं न बहार मांगूं
फूल मांगूं न बहार मांगूं
मैं तो सनम तेरा प्यार मांगूं
चैन मांगूं न करार मांगूं
मैं तो सनम तेरा प्यार मांगूं
फूल मांगूं न बहार मांगूं

जो भी छुपाया था इस दिल में मैंने तुझको बताया
राज़-ए-मोहब्बत मैंने भी तुझसे कभी ना छुपाया
कैसी होती है लगी मुझको तो बता
इसमें है बेचैनियाँ इसमें है नशा
होश मांगूं न खुमार मांगूं
होश मांगूं न खुमार मांगूं
मैं तो सनम तेरा प्यार मांगूं
फूल मांगूं न बहार मांगूं
चैन मांगूं न करार मांगूं
मैं तो सनम तेरा प्यार मांगूं
फूल मांगूं न बहार मांगूं

हर दम चाहे मुझे होगा न ऐसा दीवाना
तेरे लिए मैंने जाने जहाँ छोड़ दिया सारा ज़माना
गुजरेगी भला कैसे तन्हा जिंदगी
अब तो तेरे नाम है मेरी हर खुशी
रूप मांगूं न सिंगार मांगूं
रूप मांगूं न सिंगार मांगूं
मैं तो सनम तेरा प्यार मांगूं
फूल मांगूं न बहार मांगूं
चैन मांगूं न करार मांगूं
मैं तो सनम तेरा प्यार मांगूं
.....................................................................................
Phool mangoon na bahar mangoon-Raja 1995

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Aug 23, 2015

जा सजना तुझको भुला दिया-राजा १९९५

बिना पायल के बज गए थे घुँघरू इस फिल्म के पिछले गीत में
अब सुनते हैं थोडा कोम्प्लेक्स इमोशंस वाला एक गीत. काम्प्लेक्स
इसलिए कि बोल ही ऐसे हैं इसके. दर्द भरा गीत है, या तो इसको
सुनने से दर्द उभर आता है दिल में, या फिर ये दर्द से फोर्टिफाईड
है जैसे विटामिन बनाने वाली कम्पनियाँ अपने रैपर पर लिखती हैं
फलां फलां वस्तुओं से फोर्टिफाईड.

हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में आपको तरह तरह के दर्द भरे गीत
मिलेंगे कुछ लबालब तो कुछ कम्प्लीटली सबमर्ज्ड. कुछ आधे सीसी
के दर्द की तरह तो कुछ पूरे सरदर्द की तरह. अधिकतर सिचुएशनल
किस्म के होते हैं, दर्द क्यूँ हुआ, कहाँ हुआ ये समझने के लिए आपको
फिल्म देखनी पढ़ सकती है.

प्रस्तुत गीत अलका याग्निक और उदित नारायण का गाया हुआ है.
इसे समीर ने लिखा और नदीम श्रवण ने संगीत से     संवारा है. गीत
दर्शकों के लिए बोनस की तरह है क्यूंकि इसमें माधुरी दीक्षित ने
अभिनय किया है.




गीत के बोल:


जा सजना तुझको भुला दिया
जा सजना तुझको भुला दिया
वादा किया हंसाने का
मुझको रुला दिया
जा सजना तुझको भुला दिया
जा सजना तुझको भुला दिया
तोड़े के मेरी कसमों को
तूने दगा किया
जा सजना तुझको भुला दिया
जा जा सजना तुझको भुला दिया

पत्थर है तेरा दिल दिल नहीं
इस प्यार के तू काबिल नहीं
तेरी रगों में बहती ज़फा
तू क्या करेगा मुझसे वफ़ा
मुझको दिए हैं तूने वो गम
भूलूंगी न मैं तेरे सितम
क्या है तेरी हकीकत ये तूने बता दिया

जा सजना तुझको भुला दिया
जा सजना तुझको भुला दिया
वादा किया हंसाने का
मुझको रुला दिया
जा सजना तुझको भुला दिया
जा जा रे सजना तुझको भुला दिया

कैसी हालत है मेरी
आ तुझे मैं बताऊँ
क्या कहानी है मेरी
आ तुझे मैं सुनाऊँ
कैसी हालत है मेरी
आ तुझे मैं बताऊँ
क्या कहानी है मेरी
आ तुझे मैं सुनाऊँ
सबकी नज़र में ये प्यार था
मैं रस्ते की दीवार था
किसने यहाँ की है खता
किसको मिली है उसकी सजा
सच क्या है ये जब जानेगी तू
मेरी वफ़ा को मानेगी तू
मैंने तेरी नफरत को दिल से लगा दिया

जा सजना तुझको भुला दिया
जा जा रे सजना तुझको भुला दिया
वादा किया हंसाने का
मुझको रुला दिया
वादा किया हंसाने का
मुझको रुला दिया
जा सजना तुझको भुला दिया
जा जा सजना तुझको भुला दिया
जा जा सजना तुझको भुला दिया
जा सजना तुझको भुला दिया
……………………………………………
Ja sajna tujhko bhula diya -Raja 1995

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Mar 7, 2015

अरे सुन ओ हसीना काजल वाली-संगीत १९९२

तो श्रीमान, जिन मुखड़ों में शब्द युग्म "ओ हसीना" आता है ऐसे दो
वाकये हम पेश कर चुके हैं इस ब्लॉग पर. आइये लगे हाथ तीसरा
उदाहरण भी प्रस्तुत कर देते हैं. ये कुछ नया नया सा है. वैसे इसे
भी रुपहले परदे पर अवतरित हुए बस २३ साल ही हुए हैं. ये सन
१९९२ का गीत है फिल्म संगीत से. अब आपको ये भी बता दिया जाए,
किस किस का ओ हसीना आपने सुना है अब तक. एक तो पहले
आपने  सुना है इधर-तीसरी मंजिल से मजरूह का, दूसरा आपने
पिछली पोस्ट में सुना आनंद बक्षी वाला, अब सुनने वाले हैं आप
संतोष आनंद की कलम से निकला 'ओ हसीना ' आप कहेंगे ये तो
बेईमानी है क्यूंकि ये शब्द मुखड़े की जगह तीसरी पंक्ति में आ रहे
हैं. अब क्या करें, ये गीत इन्हीं शब्दों से प्रसिद्ध है. मुझे हमेशा ऐसे
गीतों से दिक्कत रही, जो शुरू कानपुर से होते हैं और सी. डी., कैसेट
वगैरह के विवरण में नागपुर छपा मिलता है. ऐसा अक्सर उन गीतों
के साथ भी होता है जिनके शुरू में एक आध शेर-शेरनी चिपके होते हैं.
जैसे साम्बर के साथ चटनी फ्री मिलती है, वैसे ही कुछ गीतों के
साथ शुरू में शेर फ्री मिला करते हैं हिंदी फिल्म संगीत के खजाने में.
वैसे एक बात तो तय है कुछ शेर गीत की खूबसूरती में इजाफा ही
करते हैं.

गीत फिल्माया गया है जैकी श्रोफऔर माधुरी दीक्षित पर. संगीत
तैयार किया है आनंद-मिलिंद ने. गीत को गा रहे हैं जोली मुखर्जी.
जिनकी आवाज़ बिलकुल अलग हट के है और वे सैकड़ों की भीड़
में अलग पहचाने जाते हैं. फिल्म चांदनी का शीर्षक गीत आपको
याद ही होगा-'चांदनी मेरी चांदनी' इन्हीं का गाया हुआ है.



gगीत के बोल:

ओ उड़ उड़ उड़ता जाऊं मैं पंछी अलबेला कोई
सुने या सुने न मुझको अरे गाता जाऊं अकेला

अरे सुन ओ हसीना काजल वाली, अरे सुन ओ हसीना
अरे सुन ओ हसीना काजल वाली
मेरा पूछो पता न दिलदारा मैं आवारा एक बंजारा
मेरा पूछो पता न दिलदारा मैं आवारा एक बंजारा
मैं आवारा एक बंजारा, मैं आवारा एक बंजारा
मेरा पूछो पता न दिलदारा मैं आवारा एक बंजारा
रे, मेरा पूछो पता न दिलदारा मैं आवारा एक बंजारा

तेरी साँसों के झूले में झूला झूलूँ मैं अरे झूला झूलूँ मैं
तेरे होंठों के फूलों को हौले से छू लूं, छू लूं मैं.
अरे दिल का बजाऊँ मैं इकतारा मैं आवारा एक बंजारा
हो, दिल का बजाऊँ मैं इकतारा मैं आवारा एक बंजारा

अरे सुन ओ हसीना काजल वाली, अरे सुन ओ हसीना
अरे सुन ओ हसीना काजल वाली 
मेरा पूछो पता न दिलदार मैं आवारा एक बंजारा
मेरा पूछो पता न दिलदार मैं आवारा एक बंजारा

धूप में भी चला, छांव में भी चला
अरे मन मेरा मनचला, सबसे प्यार से मिला
धूप में भी चला, छांव में भी चला
अरे मन मेरा मनचला, सबसे प्यार से मिला
पीछे मुड के देखा न दोबारा, मैं आवारा एक बंजारा
पीछे मुड के देखा न दोबारा, मैं आवारा एक बंजारा

अरे सुन ओ हसीना काजल वाली, अरे सुन ओ हसीना
अरे सुन ओ हसीना काजल वाली 
मेरा पूछो पता न दिलदार मैं आवारा एक बंजारा
रे मेरा पूछो पता न दिलदार मैं आवारा एक बंजारा
मैं आवारा एक बंजारा, मैं आवारा एक बंजारा
मेरा पूछो पता न दिलदार मैं आवारा एक बंजारा
रे मेरा पूछो पता न दिलदार मैं आवारा एक बंजारा
मैं आवारा एक बंजारा, मैं आवारा एक बंजारा
...........................................................................
O haseena kaajal wali-Sangeet 1992

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Jan 7, 2015

धिक् ताना धिक् ताना १ -हम आपके हैं कौन १९९४

बिना अनावश्यक विवरण के गीत सुनवा रहे हैं आपको. फिल्म
हम आपके हैं कौन से. सलमान खान और माधुरी दीक्षित
कलाकार हैं. गायक हैं एस पी बालसुब्रमण्यम . फिल्म और
इसके गीतों पर बाद में चर्चा करेंगे.



गीत के बोल:



धिक् ताना टिक ताना धिक् ताना
धिक्, धिक् ताना टिक ताना धिक् ताना
भाभी तुम खुशियों का खज़ाना
धिक् ताना टिक ताना धिक् ताना

पहली किरण जब से उगे
भाभी मेरी तब से जगे
सबका पूरा ध्यान धरे वो
शाम ढाले तक काम करे
कल तक रहा इस छांव से
मेरा बचपन अनजाना

धिक् ताना

होगी मेरी शादी कभी
कहते हैं ये मुझसे सभी
खुद अपनी देवरानी चुनना
बात किसी कि मत सुनना
तुम ढूंढ के रंग रूप में
अपनी परछाई लाना

धिक् ताना

कब तक रहूँ सबसे छोटा
आये कोई मुझसे छोटा
हँसता बोलता कोई खिलौना
अब इन बाहों को दो न
तुमसे मांगे घर का आँगन
प्यारा प्यारा नजराना

धिक् ताना टिक ताना धिक् ताना
धिक्, धिक् ताना टिक ताना धिक् ताना
भाभी तुम खुशियों का खज़ाना
धिक् ताना टिक ताना धिक् ताना
....................................................
Dhiktana-Hum aapke hain kaun 1994

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Dec 1, 2013

तू शायर है- साजन १९९१

सन १९९१ की प्रमुख और हिट फिल्मों में गिनी जाती है फिल्म
साजन. प्रेम त्रिकोण और त्याग वाले फार्मूले पर बनी यह
फिल्म युवा वर्ग को बहुत पसंद आई. हर पीढ़ी के अपने
आइकोन और आइडल होते हैं. माधुरी दीक्षित के अभिनय
की काफी सराहना हुई इस फिल्म के लिए.

गीत उन्हीं पर फिल्माया गया है और इसे गाया है उस समय
की सबसे व्यस्त गायिका अलका याग्निक ने. अलका याग्निक
ने माधुरी के लिए अधिकांश गीत गाये हैं. सुनते और देखते हैं
ये हिट गीत एक बार फिर.




गीत के बोल:


तू शायर है, मै तेरी शायरी
तू शायर है, मै तेरी शायरी
तू आशिक है, मै तेरी आशिकी
तुझे मिलने को दिल करता है
तुझे मिलने को दिल करता है
ओ मेरे साजना
तू शायर है, मै तेरी शायरी
तू आशिक है, मै तेरी आशिकी

तेरी हर नज्म तेरा हर गीत है याद मुझे
तेरी हर नज्म तेरा हर गीत है याद मुझे
जब तक सांस चलेगी ना भूलूंगी मै तो तुझे
तेरे बिना जीना नहीं खाके कसम कहती हुँ
मैंने बिना देखे बिना जाने तुझे दिल दे दिया
तू धड़कन है मै तेरी जिन्दगी
तू शायर है, मै तेरी शायरी
तुझे मिलने को दिल करता है
तुझे मिलने को दिल करता है
ओ मेरे साजना
तू शायर है, मै तेरी शायरी
तू आशिक है, मै तेरी आशिकी

अपनी बेताबी का मै कैसे तुझसे इजहार करू
अपनी बेताबी का मै कैसे तुझसे इजहार करू
कैसे बतलाऊ तुझे जाने जाना कितना मै प्यार करू
लब पे कोई नाम नहीं, तेरे सिवा मेरे साजन
लब पे कोई नाम नहीं, तेरे सिवा मेरे साजन
मेरे इस दिल पे तेरा ही नशा छा गया
तू दीवाना मै तेरी दीवानगी
तू शायर है, मै तेरी शायरी
तुझे मिलने को दिल करता है
तुझे मिलने को दिल करता है 
ओ मेरे साजना

तू शायर है, मै तेरी शायरी
तू आशिक है, मै तेरी आशिकी
........................................................
Too shayar hai-Sajan 1991

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Oct 25, 2011

चने के खेत में-अंजाम १९९४

गोरी बाजरे के खेत में दिखे या चने के खेत में, गोरी ही रहेगी और हमेशा
सुन्दर और प्यार करने लायक दिखाई देगी। हिंदी फिल्मों की फिलासफ़ी
के अनुसार ऐसा कई गीतों में और दृश्यों में अनुभव किया होगा दर्शक ने।
युग परिवर्तन के साथ साथ केवल नायक नायिका की वेश भूषा ही बदली
होगी, मूल भाव जस का तस है।

खेत एक समय(आज भी हैं) भांति भांति के क्रियाकलापों का केंद्र हुआ
करते थे। इसमें कूटनीति की चर्चा, मसाला कुटाई की चर्चा से लगा कर
भावनाओं की कुटाई तक कई मसले हल किये जाते रहे। अब इतने
महत्पूर्ण पहलू का दोहन अगर कवि और गीतकार नहीं करेंगे तो ये तो
खेत और खलिहान की उपेक्षा वाली बात हो जाएगी न।

आपको पिछले वर्ष एक गीत सुनवाया था फिल्म चाचा जिंदाबाद से
जिसमें एक पंक्ति है-बाजरे के खेत में सुरतिया दिखा जा गोरी


आज आपको चने के खेत पर केंद्रित गीत सुनवा रहे हैं। इसे आप कृषि
प्रधान या पर्यावरण प्रेमी गीत की संज्ञा प्रदान कर सकते हैं। फिल्म का
नाम है अंजाम जिसमें शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित की प्रमुख
भूमिकाएं हैं। गीत गाया है खटिया पटिया गीतों से चर्चा में आई गायिका
पूर्णिमा ने। पूर्णिमा ने कई गीत गाये हैं मगर उनके वे गीत सबसे ज्यादा
पसंद किये जाते हैं जिनमें उत्तेजना जगाने वाला भाव होता है। ये उनकी
आवाज़ का ही कमाल है जो सुनने वालों को उनकी आवाज़ का दीवाना
बना देता है, ये पहलू उनकी कई समकालीन गायिकाओं की आवाज़ से
नदारद है।



गीत के बोल:

अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
फँसी गोरी
फँसी गोरी चने के खेत में
हुई चोरी चने के खेत में

पहले तो जुल्मे ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबी
पहले तो जुल्मे ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबी
जोरा जोरी
जोरा जोरी चने के खेत में
हुई चोरी चने के खेत में
तू तू तू तू, तू तू तू तू

मेरे आगे पीछे शिकारियों के घेरे
बैठे वहां सारे जवानी के लुटेरे
हाँ, मेरे आगे पीछे शिकारियों के घेरे
बैठे वहां सारे जवानी के लुटेरे
हारी मैं हारी पुकार के
यहाँ वहां देखूं निहार के
यहाँ वहां देखूं निहार के
जोबन पे चुनरी गिरा के चली थी
हाँ, जोबन पे चुनरी गिरा के चली थी
हाथों में कंगना सजा के चली थी
चूड़ी टूटी
चूड़ी टूटी चने के खेत में
जोरा जोरी चने के खेत में

तौबा मेरी तौबा, निगाहें ना मिलाऊँ
ऐसे कैसे सब को कहानी मैं बताऊँ
तौबा मेरी तौबा, निगाहें ना मिलाऊँ
ऐसे कैसे सब को कहानी मैं बताऊँ
क्या क्या हुआ मेरे साथ रे
कोई भी तो आया ना हाथ रे
कोई भी तो आया ना हाथ रे
लहंगे में गोटा जड़ा के चली थी
लहंगे में गोटा जड़ा के चली थी
बालों में गजरा लगा के चली थी
बाली छूटी
बाली छूटी चने के खेत में
ओ जोरा जोरी चने के खेत में

अठरह बरस की कंवारी कली थी
घूंघट में मुखड़ा छुपा के चली थी
फँसी गोरी
फँसी गोरी चने के खेत में
रे हुई चोरी चने के खेत में
पहले तो जुल्मी ने पकड़ी कलाई
फिर उसने चुपके से ऊँगली दबाई
जोरा जोरी
जोरा जोरी चने के खेत में
रे हुई चोरी चने के खेत में
...............................
Chane ke khet mein-Anjaam १९९४

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Aug 7, 2011

देखा तुझे तो-कोयला १९९७

क से कोट , क से कोयला. फिल्म निर्देशकों ने नायक शाहरुख खान को
उनकी शुरूआती फिल्मों में खूब ओवर साइज़ कोट पहनाए. आइये सुनें
राकेश रोशन निर्देशित कोयला फिल्म से एक हिट गीत. फिल्म ज्यादा
नहीं चली मगर इसके गीत थोड़े बहुत बजे जिसमें सबसे ज्यादा बजा
प्रस्तुत गीत . यह गीत अलका याग्निक और कुमार सानू की आवाजों
में है. नायिका को तो आप पहचान ही गए होंगे-हुसैन की गज-गामिनी.

कुमार सानू की "हो" उनके अधिकतर गीतों में जबरन ठूंसी हुई लगती
है. शायद किसी ने भी उनको ये नहीं बताया कि उनकी "हों हों " सुनने
में कतई कर्णप्रिय नहीं लगती है.

गीत माधुरी दीक्षित पर ही केंद्रित है और नायक इसमें एक सहायक कलाकार
जितनी भूमिका निभा रहा है. माधुरी की उपस्थिति से भी फिल्म की जो
बॉक्स ऑफिस की स्तिथि थी उस पर कोई सुधार नहीं आया.





गीत के बोल:

देखा तुझे तो हो गयी दीवानी
पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं

देखा तुझे तो हो गयी दीवानी
पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं

तेरे संग जीने को आया
तन मन अपना देने लाया

देखा तुझे तो जीने लगे हम
पा लें तुझे तो न हो मरने का गम


खुश नसीबी से मुझे प्यार इतना मिल गया
आज आँचल ही मेरा मुझको कम लगने लगा
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
खुश नसीबी से मुझे प्यार इतना मिल गया
आज आँचल ही मेरा मुझको कम लगने लगा
मांगने तेरा हाथ मैं आया
देने सारा जीवन लाया

देखा तुझे तो, हाँ जीने लगे हम
पा लें तुझे तो न हो मरने का गम

चाहना न चाहना किसके बस की बात है
दिल का आज आना किसी पर किस्मतों के हाथ है
हो ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ
चाहना न चाहना किसके बस की बात है
दिल का आज आना किसी पर किस्मतों के हाथ है
पहले प्यार को मिटते न देखा
ये तो है पत्थर कि रेखा

देखा तुझे तो हो गयी दीवानी
पा लूं तुझे तो मर न जाऊं कहीं

तेरे संग जीने को आया
तन मन अपना देने लाया

देखा तुझे तो, हाँ जीने लगे हम
पा लें तुझे तो न हो मरने का गम
...............................................
Dekha tujhe to-Koyla 1997

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May 19, 2011

बटाटा वडा-हिफाज़त १९८७

आपको सन १९४१ के गीत के जिक्र के वक़्त बताया था कि फिल्म निर्माण
की तकनीक ने इस कदर विकास किया कि ज़मीन पर रेंगते रेंगते गीत गाते
नायक नायिका हवा में उड़ कर भी गीत गाने लगे। विशेष प्रभावों के माध्यम
से ये संभव हुआ। प्रस्तुत गीत में भी एक ऐसा ही प्रभाव है।

लगभग सभी खाने पीने की चीज़ें गीतों के माध्यम से बोलिवुडियों ने याद
कर ली हैं। बॉलीवुड की उत्पत्ति हुई है बम्बई में तो बटाटा वडा कैसे
भुलाया जा सकता है। आम और ख़ास दोनों वर्गों को समान रूप से प्रिय
ये बम्बैया खाना आपको शहर में हर जगह आसानी से और उत्तम गुणवत्ता
वाला मिल जायेगा। इसे जनता नाश्ते और खाने में जैसे चाहे खाती है,
चटनी के साथ, बिना चटनी के।

फिल्म में कहानी कुछ यूँ है-नायक नायिका एक बटाटा वडे की दुकान
पर पहुँच जाते हैं, वहां बटाटा बड़े बनाने वाली महिला वडे के मसाले
में गलती से भांग डाल देती है। भांग वाले वडे खाने के बाद क्या होता है
वो इस गीत में आप देखिये। गीत का मसाला तैयार किया है आनंद बक्षी
ने और इसको धुन में तल कर स्वादिष्ट बनाया है आर डी बर्मन ने। गाने
वाले कलाकार हैं-एस पी बालसुब्रमण्यम और एस जानकी ।





गीत के बोल:

बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा

बटाटा वडा हे
बटाटा वडा
प्यार नहीं करना था, करना पड़ा
बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा

बटाटा वडा, बटाटा वडा

होते जो होश मं हम
ऐसे ना झूम जाते
अच्छा यही था पहले
हम तुम ना पास आते
हो ओ ओ ओ ओ
अब दूर जाना है मुश्किल बड़ा

बटाटा वडा, हे
बटाटा वडा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, डा डा डा डा डा
बटाटा वडा

लगता है आज दिल के
अरमान निकाल रहे हैं
कैसी है आग जिस में
हम दोनों जल रहे हैं

जा ठन्डे पानी का
ले आ तू घड़ा

बटाटा वडा है
बटाटा वडा हा हा हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
हो हो हो हो हो हो हो

बटाटा वडा, बटाटा वडा

मस्ती में दिल की कश्ती
जाये ना डूब अपनी
डूबे के पार उतरे
जोड़ी है खूब अपनी
तू भी है कंवारी
मैं भी हूँ छडा, हा हा हा हा हा

बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा आ हा हा हा
दिल नहीं देना था, देना पड़ा
बटाटा वडा, आ हा हा
बटाटा वडा, टा वडा
टा वडा

........................
Batata Wada-Hifazat 1987

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Dec 8, 2010

मैं बोतल नहीं शराब की-साहिबान १९९३

मैं बोतल नहीं शराब की-ये गीत है साहिबान फिल्म से।
इस गीत में आप फिल्म के खलनायक संजय दत्त और
नायिका माधुरी दीक्षित को देखेंगे। हिंदी फिल्मों में ये
किस्सा बहुत पुराना हो चला है। खलनायक मदिरा सेवन
करता मिलेगा और नायिका उसके सामने कोई गीत गा
रही होती है। गीत में नायिका खलनायक को ललकारती
सी प्रतीत होती है। वो जो कुछ भी कह रही है उसका मतलब
यही है कि -तू मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता ।

आइये सुनें आनंद बक्षी का लिखा और अनुराधा पौडवाल का
गाया ये गीत। संगीत शिव-हरी का है। गीत में संजय दत्त की
जो हेयर स्टाइल है उसकी नक़ल एक ज़माने में रिक्शा,बस
और टेम्पो चलाने वालों ने बहुत की थी।



गीत के बोल:

मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा
मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा
मैं पंखुड़ी नहीं गुलाब की जिसे तोड़ के तू ले जायेगा

मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा
मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा

ना खेल ना कोई खिलौना हूँ
ना सेज ना कोई बिछौना हूँ
ना खेल ना कोई खिलौना हूँ
ना सेज ना कोई बिछौना हूँ

मैं मिटटी नहीं हूँ सोना हूँ
बाज़ार में जो बिक जायेगा पर मुझे खरीद ना पायेगा

मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा
मैं पंखुड़ी नहीं गुलाब की जिसे तोड़ के तू ले जायेगा
मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा

मैं दौलत नहीं मोहब्बत हूँ
मैं सारे गाँव की इज्ज़त हूँ
अपने साजन की अमानत हूँ
मैं दौलत नहीं मोहब्बत हूँ
मैं सारे गाँव की इज्ज़त हूँ
अपने साजन की अमानत हूँ

तू मुझको हाथ लगाएगा तो पत्थर का बन जायेगा

मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा
मैं पंखुड़ी नहीं गुलाब की जिसे तोड़ के तू ले जायेगा
मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा
मैं बोतल नहीं शराब की जिसे खोल के तू पी जायेगा
....................................
Main botal nahin sharab ki-Sahibaan 1993

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Dec 6, 2010

कैसे जियूँगा मैं-साहिबां १९९३

शिव हरि का नाम लिया है तो उनका एक और मधुर गीत
सुन लिया जाए । शिव कुमार शर्मा और हरिप्रसाद चौरसिया
दो दिग्गज हस्तियाँ हैं शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में। उनके
फ़िल्मी गीतों में भी फिनिशिंग ज़बरदस्त मिलेगी आपको।

संजय दत्त, ऋषि कपूर और माधुरी अभिनीत फिल्म साहिबां
सन १९९३ में आई थी। आखिर ऋषि कपूर को भी माधुरी के
साथ काम करने का मौका मिल ही गया। उन्होंने ३-४ फिल्मों
में साथ काम किया है । ९० के दशक का पूर्वार्ध धक्-धक्
गर्ल के नाम है, हर दूसरी फिल्म में वे ही नज़र आतीं। उन्होंने
सन १९८७ से सन १९९७ तक सिल्वर स्क्रीन पर राज़ किया।

तो सुनिए आनंद बक्षी का लिखा, अनुराधा पौडवाल और
जोली मुखर्जी का गाया गीत । माधुरी की ज़रा ज़रा देर
में मुस्कुराने की आदत गुज़रे ज़माने की अभिनेत्री श्यामा
की याद दिलाती है। गौर फरमाएं-ये पंक्तियाँ- डूब मरूंगी
मैं -इसे मुस्कुरा के गाते आपने किसी अभिनेत्री को नहीं
देखा होगा कभी।




गीत के बोल:

कैसे जिऊंगा मैं, हो
कैसे जिऊंगा मैं अगर तू न बनी मेरी साहिबां
मेरी साहिबां, मेरी साहिबां, हो

डूब मरूंगी मैं अगर मैं न बनी हो तेरी साहिबां
तेरी साहिबां, तेरी साहिबां, हो

लाखों हज़ारों में सैयां मैने चुन लिया
हो ओ ओ, लाखों हज़ारों में सैयां मैने चुन लिया
लाखों हज़ारों ने फ़ैसला ये सुन लिया
हो, एक दूजे के वास्ते हम बने मेरे साजना
मेरी साहिबां,
तेरी साहिबां, हो

कहती है क्या मुझसे पायल तेरे पांव की
हो ओ ओ, कहती है क्या मुझसे पायल तेरे पांव की
एक सीधी सादी सी लड़की मैं गांव की
तेरे होंठों की बांसुरी बन गई मेरे साजना
मेरी साहिबां,
तेरी साहिबां, हो

जो अंतरा विडियो गीत से गायब है वो यूँ है

रातें गुज़रती हैं सारी रात जाग के
दिल चाहे आ जाऊं घर से मैं भाग के
ओ आना मगर डोली में बैठ कर मेरी साहिबां
मेरी साहिबां,
तेरी साहिबां
तेरी साहिबां

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Nov 11, 2010

गज़र ने किया है इशारा-त्रिदेव १९८९

एक बाल रंगने के विज्ञापन देखा। उसकी नायिका "अपना ख्याल रखना"
को कुछ इस तरीके से बोलती है जैसे किसी होटल में आर्डर दे रही हो-
एक प्लेट भजिया लाना। फिल्म के अभिनेताओं और विज्ञापन के
मॉडल में ये फर्क कई बार महसूस किया जा सकता है। उसी उत्पाद के
विज्ञापन में आजकल जॉन अब्राहम नज़र आते हैं जो अपनी मोहक
मुस्कान के साथ कहते हैं-"टेक केयर"। कहने के तरीके से कितना फर्क
पढता है। विज्ञापन जगत से कई कलाकार फिल्म जगत में आये। कुछ
टी वी पर भी दिखाई दिए। इनमे सभी सफल नहीं हुए। प्रीटी जिनता एक
नाम है जिसे हमने सबसे पहले लिरिल साबुन के विज्ञापन में देखा और
जो बाद में फिल्मों में भी आयीं और बेहद सफल रहीं। विज्ञापन जगत से
फिल्मों में आनेवाली अभिनेत्रियों में एक नाम और है-संगीता बिजलानी
जो अभिनय के क्षेत्र में कम और दूसरी वजहों से ज्यादा चर्चित रहीं। उन्होंने
एक्का दुक्का फिल्मों में काम किया जिसमे प्रमुख है राजीव राय निर्देशित
त्रिदेव। आइये इस फिल्म का एक गीत सुना जाए जो ३ अभिनेत्रियों पर
फिल्माया गया है -माधुरी दीक्षित, सोनम और संगीता बिजलानी।

त्रिदेव फिल्म का एक गीत हम आपको पहले सुनवा चुके है -जो इधर है
ओये ओये । उसी का स्त्री संस्करण आज प्रस्तुत है।

अगर आप नियमित हिंदी फिल्म दर्शक है तो आपको समझने में देर
नहीं लगेगी की ये नायिकाएं खलनायक और उसकी जमात के सामने
क्यूँ नाच रही हैं। ये एक पुराना फार्मूला है फिल्मों का जिसे समय समय
पर नया कलेवर दे के परोसा जाता है। इस गीत में भी सितारा टूटने का
जिक्र है और उसे आने वाली क़यामत से जोड़ कर देखा जा रहा है।



गीत के बोल:

ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ

गज़र ने किया है इशारा
घडी भर का है खेल सारा
गज़र ने किया है इशारा
घडी भर का है खेल सारा
तमाशाई बन जायेंगे खुद तमाशा
बदल जायेगा ये नज़ारा
हाँ, बदल जायेगा ये नज़ारा

गज़र ने किया है इशारा

ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओ , ओ आ
ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओ , ओ आ

इशारों पे हमको नचा लो
चलो जश्न ये तुम मना लो
के जी भर के हमको सता लो

इशारों पे हमको नचा लो
चलो जश्न ये तुम मना लो
के जी भर के हमको सता लो

नहीं कुछ कहेंगे
के हंस के सहेंगे
सितमगर सितम हम तुम्हारा
हाँ, सितमगर सितम हम तुम्हारा

गज़र ने किया है इशारा
घडी भर का है खेल सारा
गज़र ने किया है इशारा
घडी भर का है खेल सारा
तमाशाई बन जायेंगे खुद तमाशा
बदल जायेगा ये नज़ारा
हाँ, बदल जायेगा ये नज़ारा

गज़र ने किया है इशारा

ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओ , ओ आ
ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओ , ओ आ

ख्यालों में तुम खो ना जाना
मेरे दुश्मनों सो ना जाना
के मदहोश तुम हो ना जाना
ख्यालों में तुम खो ना जाना
मेरे दुश्मनों सो ना जाना
के मदहोश तुम हो ना जाना

ज़रा आज की रात भरी है तुमपे
के टूटा है कोई सितारा
हाँ, के टूटा है कोई सितारा

गज़र ने किया है इशारा

ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओ , ओ आ
ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओ , ओ आ

ज़माने का दस्तूर क्या है
मुक्कादर को मंजूर क्या है
भला पास क्या डोर क्या है
ज़माने का दस्तूर क्या है
मुक्कादर को मंजूर क्या है
भला पास क्या डोर क्या है

नहीं कुछ पटा हमको बस ये पता है
ये दिन आखरी है तुम्हारा
हाँ, ये दिन आखरी है तुम्हारा

गज़र ने किया है इशारा
घडी भर का है खेल सारा
गज़र ने किया है इशारा
घडी भर का है खेल सारा
तमाशाई बन जायेंगे खुद तमाशा
बदल जायेगा ये नज़ारा
हाँ, बदल जायेगा ये नज़ारा

गज़र ने किया है इशारा

ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओ , ओ आ
ओये ओये, ओये ओये
ओये ओ , ओ आ
ओये ओ , ओ आ

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